दैनिक पंचांग
मुंबई पंचांग, गुरु, 4 जुलाई 2030
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में सूर्योदय सुबह 6:05 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र आश्लेषा, योग हर्षण और करण गर है। राहु काल दोपहर 2:22 – शाम 4:01 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:05
- सूर्यास्त
- रात 7:20
- तिथि
- तृतीया · सुबह 6:52 तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा · शाम 6:25 तक
- योग
- हर्षण
- करण
- गर
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 2:22 – शाम 4:01
- यमगंड
- सुबह 6:05 – सुबह 7:44
- गुलिक काल
- सुबह 9:24 – सुबह 11:03
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:09 – दोपहर 12:57
- अमृत काल
- सुबह 11:53 – दोपहर 1:32
आज मुंबई में
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में सूर्योदय सुबह 6:05 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र आश्लेषा, योग हर्षण और करण गर है। राहु काल दोपहर 2:22 – शाम 4:01 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल मुंबई के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 5 जुलाई 2030 | चतुर्थी | मघा | सुबह 11:03 – दोपहर 12:43 |
| शनि, 6 जुलाई 2030 | पंचमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 9:24 – सुबह 11:03 |
| रवि, 7 जुलाई 2030 | षष्ठी | उत्तरा फाल्गुनी | शाम 5:41 – रात 7:20 |
| सोम, 8 जुलाई 2030 | अष्टमी | हस्त | सुबह 7:46 – सुबह 9:25 |
| मंगल, 9 जुलाई 2030 | नवमी | चित्रा | शाम 4:01 – शाम 5:41 |
| बुध, 10 जुलाई 2030 | दशमी | स्वाती | दोपहर 12:43 – दोपहर 2:22 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; सुबह 6:52 तक।
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र आश्लेषा है; शाम 6:25 तक।
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में राहु काल कब है?
मुंबई में राहु काल दोपहर 2:22 – शाम 4:01 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 4 जुलाई 2030 को मुंबई में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:05 और सूर्यास्त रात 7:20 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।