दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 7 नवंबर 2032
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:20 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र मूल, योग अतिगण्ड और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:56 – शाम 5:19 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:20
- सूर्यास्त
- शाम 5:19
- तिथि
- चतुर्थी · सुबह 10:31 तक
- नक्षत्र
- मूल · शाम 6:09 तक
- योग
- अतिगण्ड
- करण
- विष्टि
- वार
- रविवार
- राहु काल
- दोपहर 3:56 – शाम 5:19
- यमगंड
- सुबह 11:49 – दोपहर 1:12
- गुलिक काल
- दोपहर 2:34 – दोपहर 3:56
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:22 – दोपहर 12:10
- अमृत काल
- दोपहर 12:30 – दोपहर 1:53
आज लखनऊ में
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:20 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र मूल, योग अतिगण्ड और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:56 – शाम 5:19 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 8 नवंबर 2032 | पंचमी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 7:43 – सुबह 9:05 |
| मंगल, 9 नवंबर 2032 | षष्ठी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 2:34 – दोपहर 3:56 |
| बुध, 10 नवंबर 2032 | सप्तमी | श्रवण | सुबह 11:49 – दोपहर 1:11 |
| गुरु, 11 नवंबर 2032 | नवमी | धनिष्ठा | दोपहर 1:11 – दोपहर 2:33 |
| शुक्र, 12 नवंबर 2032 | दशमी | शतभिषा | सुबह 10:28 – सुबह 11:50 |
| शनि, 13 नवंबर 2032 | एकादशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 9:07 – सुबह 10:28 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी है; सुबह 10:31 तक।
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मूल है; शाम 6:09 तक।
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 3:56 – शाम 5:19 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 7 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:20 और सूर्यास्त शाम 5:19 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।