दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, गुरु, 26 अगस्त 2032
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:43 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र भरणी, योग गण्ड और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:20 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:43
- सूर्यास्त
- शाम 6:32
- तिथि
- षष्ठी · दोपहर 1:48 तक
- नक्षत्र
- भरणी · रात 11:18 तक
- योग
- गण्ड
- करण
- वणिज
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:43 – दोपहर 3:20
- यमगंड
- तड़के 5:43 – सुबह 7:19
- गुलिक काल
- सुबह 8:55 – सुबह 10:31
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:35 – दोपहर 12:23
- अमृत काल
- सुबह 11:19 – दोपहर 12:55
आज लखनऊ में
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:43 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र भरणी, योग गण्ड और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:20 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 27 अगस्त 2032 | सप्तमी | कृत्तिका | सुबह 10:31 – दोपहर 12:07 |
| शनि, 28 अगस्त 2032 | अष्टमी | रोहिणी | सुबह 8:55 – सुबह 10:31 |
| रवि, 29 अगस्त 2032 | नवमी | मृगशिरा | शाम 4:53 – शाम 6:29 |
| सोम, 30 अगस्त 2032 | दशमी | आर्द्रा | सुबह 7:20 – सुबह 8:55 |
| मंगल, 31 अगस्त 2032 | एकादशी | पुनर्वसु | दोपहर 3:16 – शाम 4:51 |
| बुध, 1 सितंबर 2032 | द्वादशी | पुनर्वसु | दोपहर 12:05 – दोपहर 1:40 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि षष्ठी है; दोपहर 1:48 तक।
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र भरणी है; रात 11:18 तक।
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:20 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 26 अगस्त 2032 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:43 और सूर्यास्त शाम 6:32 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।