दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, गुरु, 1 अप्रैल 2032
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र अनुराधा, योग सिद्धि और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:16 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:56
- सूर्यास्त
- शाम 6:23
- तिथि
- पंचमी · सुबह 7:12 तक
- नक्षत्र
- अनुराधा · तड़के 5:33 तक
- योग
- सिद्धि
- करण
- तैतिल
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:43 – दोपहर 3:16
- यमगंड
- तड़के 5:56 – सुबह 7:30
- गुलिक काल
- सुबह 9:03 – सुबह 10:36
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:39 – दोपहर 12:27
- अमृत काल
- सुबह 11:23 – दोपहर 12:56
आज लखनऊ में
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र अनुराधा, योग सिद्धि और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:16 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 2 अप्रैल 2032 | षष्ठी | मूल | सुबह 10:36 – दोपहर 12:09 |
| शनि, 3 अप्रैल 2032 | अष्टमी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 9:02 – सुबह 10:35 |
| रवि, 4 अप्रैल 2032 | नवमी | उत्तराषाढ़ा | शाम 4:51 – शाम 6:25 |
| सोम, 5 अप्रैल 2032 | दशमी | श्रवण | सुबह 7:26 – सुबह 9:00 |
| मंगल, 6 अप्रैल 2032 | एकादशी | धनिष्ठा | दोपहर 3:17 – शाम 4:51 |
| बुध, 7 अप्रैल 2032 | द्वादशी | शतभिषा | दोपहर 12:08 – दोपहर 1:42 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; सुबह 7:12 तक।
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अनुराधा है; तड़के 5:33 तक।
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 1:43 – दोपहर 3:16 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 1 अप्रैल 2032 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:56 और सूर्यास्त शाम 6:23 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।