दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 19 अक्टूबर 2031
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:07 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र अनुराधा, योग प्रीति और करण गर है। राहु काल शाम 4:08 – शाम 5:34 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:07
- सूर्यास्त
- शाम 5:34
- तिथि
- तृतीया · सुबह 10:13 तक
- नक्षत्र
- अनुराधा · रात 2:19 तक
- योग
- प्रीति
- करण
- गर
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:08 – शाम 5:34
- यमगंड
- सुबह 11:51 – दोपहर 1:16
- गुलिक काल
- दोपहर 2:42 – शाम 4:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:22 – दोपहर 12:10
- अमृत काल
- दोपहर 12:33 – दोपहर 1:59
आज लखनऊ में
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:07 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र अनुराधा, योग प्रीति और करण गर है। राहु काल शाम 4:08 – शाम 5:34 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 20 अक्टूबर 2031 | चतुर्थी | ज्येष्ठा | सुबह 7:33 – सुबह 8:59 |
| मंगल, 21 अक्टूबर 2031 | पंचमी | मूल | दोपहर 2:41 – शाम 4:07 |
| बुध, 22 अक्टूबर 2031 | सप्तमी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 11:50 – दोपहर 1:15 |
| गुरु, 23 अक्टूबर 2031 | अष्टमी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 1:15 – दोपहर 2:40 |
| शुक्र, 24 अक्टूबर 2031 | नवमी | श्रवण | सुबह 10:25 – सुबह 11:50 |
| शनि, 25 अक्टूबर 2031 | दशमी | धनिष्ठा | सुबह 9:00 – सुबह 10:25 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; सुबह 10:13 तक।
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अनुराधा है; रात 2:19 तक।
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल शाम 4:08 – शाम 5:34 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 19 अक्टूबर 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:07 और सूर्यास्त शाम 5:34 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।