दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 11 अगस्त 2031
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:35 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र कृत्तिका, योग वृद्धि और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:14 – सुबह 8:53 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:35
- सूर्यास्त
- शाम 6:46
- तिथि
- नवमी · रात 8:17 तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका · दोपहर 3:23 तक
- योग
- वृद्धि
- करण
- तैतिल
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:14 – सुबह 8:53
- यमगंड
- सुबह 10:32 – दोपहर 12:11
- गुलिक काल
- दोपहर 1:50 – दोपहर 3:29
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:38 – दोपहर 12:26
- अमृत काल
- सुबह 6:25 – सुबह 8:04
आज लखनऊ में
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:35 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र कृत्तिका, योग वृद्धि और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:14 – सुबह 8:53 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 12 अगस्त 2031 | दशमी | रोहिणी | दोपहर 3:28 – शाम 5:07 |
| बुध, 13 अगस्त 2031 | एकादशी | मृगशिरा | दोपहर 12:10 – दोपहर 1:49 |
| गुरु, 14 अगस्त 2031 | द्वादशी | आर्द्रा | दोपहर 1:49 – दोपहर 3:27 |
| शुक्र, 15 अगस्त 2031 | त्रयोदशी | पुनर्वसु | सुबह 10:32 – दोपहर 12:10 |
| शनि, 16 अगस्त 2031 | त्रयोदशी | पुष्य | सुबह 8:54 – सुबह 10:32 |
| रवि, 17 अगस्त 2031 | चतुर्दशी | पुष्य | शाम 5:03 – शाम 6:41 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि नवमी है; रात 8:17 तक।
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र कृत्तिका है; दोपहर 3:23 तक।
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 7:14 – सुबह 8:53 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 11 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:35 और सूर्यास्त शाम 6:46 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।