दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 28 अप्रैल 2031
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:30 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग सुकर्मा और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:47 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:30
- सूर्यास्त
- शाम 6:37
- तिथि
- षष्ठी · सुबह 9:24 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · रात 1:26 तक
- योग
- सुकर्मा
- करण
- तैतिल
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:09 – सुबह 8:47
- यमगंड
- सुबह 10:25 – दोपहर 12:03
- गुलिक काल
- दोपहर 1:42 – दोपहर 3:20
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:31 – दोपहर 12:19
- अमृत काल
- सुबह 6:20 – सुबह 7:58
आज लखनऊ में
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:30 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग सुकर्मा और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:47 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 29 अप्रैल 2031 | सप्तमी | पुष्य | दोपहर 3:20 – शाम 4:59 |
| बुध, 30 अप्रैल 2031 | अष्टमी | आश्लेषा | दोपहर 12:03 – दोपहर 1:42 |
| गुरु, 1 मई 2031 | नवमी | आश्लेषा | दोपहर 1:42 – दोपहर 3:21 |
| शुक्र, 2 मई 2031 | दशमी | मघा | सुबह 10:24 – दोपहर 12:03 |
| शनि, 3 मई 2031 | एकादशी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 8:45 – सुबह 10:24 |
| रवि, 4 मई 2031 | द्वादशी | उत्तरा फाल्गुनी | शाम 5:01 – शाम 6:40 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि षष्ठी है; सुबह 9:24 तक।
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; रात 1:26 तक।
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:47 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 28 अप्रैल 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:30 और सूर्यास्त शाम 6:37 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।