दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 23 फ़रवरी 2031
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग शिव और करण बालव है। राहु काल शाम 4:37 – शाम 6:03 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:36
- सूर्यास्त
- शाम 6:03
- तिथि
- द्वितीया · शाम 5:26 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद · दोपहर 3:36 तक
- योग
- शिव
- करण
- बालव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:37 – शाम 6:03
- यमगंड
- दोपहर 12:19 – दोपहर 1:45
- गुलिक काल
- दोपहर 3:11 – शाम 4:37
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:51 – दोपहर 12:39
- अमृत काल
- दोपहर 1:02 – दोपहर 2:28
आज लखनऊ में
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग शिव और करण बालव है। राहु काल शाम 4:37 – शाम 6:03 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 24 फ़रवरी 2031 | तृतीया | उत्तरा भाद्रपद | सुबह 8:01 – सुबह 9:27 |
| मंगल, 25 फ़रवरी 2031 | चतुर्थी | रेवती | दोपहर 3:12 – शाम 4:38 |
| बुध, 26 फ़रवरी 2031 | पंचमी | अश्विनी | दोपहर 12:19 – दोपहर 1:45 |
| गुरु, 27 फ़रवरी 2031 | षष्ठी | भरणी | दोपहर 1:45 – दोपहर 3:12 |
| शुक्र, 28 फ़रवरी 2031 | सप्तमी | कृत्तिका | सुबह 10:52 – दोपहर 12:18 |
| शनि, 1 मार्च 2031 | अष्टमी | रोहिणी | सुबह 9:24 – सुबह 10:51 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; शाम 5:26 तक।
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है; दोपहर 3:36 तक।
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल शाम 4:37 – शाम 6:03 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 23 फ़रवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:36 और सूर्यास्त शाम 6:03 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।