दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, गुरु, 16 जनवरी 2031
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र चित्रा, योग अतिगण्ड और करण बव है। राहु काल दोपहर 1:35 – दोपहर 2:55 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:56
- सूर्यास्त
- शाम 5:35
- तिथि
- सप्तमी · सुबह 6:44 तक
- नक्षत्र
- चित्रा · रात 2:43 तक
- योग
- अतिगण्ड
- करण
- बव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:35 – दोपहर 2:55
- यमगंड
- सुबह 6:56 – सुबह 8:16
- गुलिक काल
- सुबह 9:36 – सुबह 10:56
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:49 – दोपहर 12:37
- अमृत काल
- सुबह 11:35 – दोपहर 12:55
आज लखनऊ में
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र चित्रा, योग अतिगण्ड और करण बव है। राहु काल दोपहर 1:35 – दोपहर 2:55 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 17 जनवरी 2031 | अष्टमी | स्वाती | सुबह 10:56 – दोपहर 12:16 |
| शनि, 18 जनवरी 2031 | दशमी | विशाखा | सुबह 9:36 – सुबह 10:56 |
| रवि, 19 जनवरी 2031 | एकादशी | अनुराधा | शाम 4:17 – शाम 5:37 |
| सोम, 20 जनवरी 2031 | द्वादशी | ज्येष्ठा | सुबह 8:16 – सुबह 9:36 |
| मंगल, 21 जनवरी 2031 | त्रयोदशी | मूल | दोपहर 2:58 – शाम 4:18 |
| बुध, 22 जनवरी 2031 | चतुर्दशी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 12:17 – दोपहर 1:38 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; सुबह 6:44 तक।
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र चित्रा है; रात 2:43 तक।
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 1:35 – दोपहर 2:55 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 16 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:56 और सूर्यास्त शाम 5:35 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।