दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, मंगल, 3 दिसंबर 2030
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:39 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग हर्षण और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:34 – दोपहर 3:53 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:39
- सूर्यास्त
- शाम 5:12
- तिथि
- नवमी · शाम 4:27 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद · दोपहर 1:16 तक
- योग
- हर्षण
- करण
- कौलव
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 2:34 – दोपहर 3:53
- यमगंड
- सुबह 9:17 – सुबह 10:36
- गुलिक काल
- सुबह 11:55 – दोपहर 1:15
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:29 – दोपहर 12:17
- अमृत काल
- सुबह 8:37 – सुबह 9:57
आज लखनऊ में
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:39 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग हर्षण और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:34 – दोपहर 3:53 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 4 दिसंबर 2030 | दशमी | उत्तरा भाद्रपद | सुबह 11:56 – दोपहर 1:15 |
| गुरु, 5 दिसंबर 2030 | एकादशी | रेवती | दोपहर 1:15 – दोपहर 2:34 |
| शुक्र, 6 दिसंबर 2030 | द्वादशी | अश्विनी | सुबह 10:38 – सुबह 11:57 |
| शनि, 7 दिसंबर 2030 | त्रयोदशी | भरणी | सुबह 9:19 – सुबह 10:38 |
| रवि, 8 दिसंबर 2030 | चतुर्दशी | कृत्तिका | दोपहर 3:54 – शाम 5:13 |
| सोम, 9 दिसंबर 2030 | पूर्णिमा | रोहिणी | सुबह 8:02 – सुबह 9:20 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि नवमी है; शाम 4:27 तक।
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है; दोपहर 1:16 तक।
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 2:34 – दोपहर 3:53 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 3 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:39 और सूर्यास्त शाम 5:12 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।