दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 16 सितंबर 2030
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र भरणी, योग ध्रुव और करण कौलव है। राहु काल सुबह 7:24 – सुबह 8:56 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:09
- तिथि
- पंचमी · सुबह 7:06 तक
- नक्षत्र
- भरणी · रात 12:31 तक
- योग
- ध्रुव
- करण
- कौलव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:24 – सुबह 8:56
- यमगंड
- सुबह 10:28 – दोपहर 12:00
- गुलिक काल
- दोपहर 1:33 – दोपहर 3:05
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- सुबह 6:38 – सुबह 8:10
आज लखनऊ में
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र भरणी, योग ध्रुव और करण कौलव है। राहु काल सुबह 7:24 – सुबह 8:56 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 17 सितंबर 2030 | पंचमी | कृत्तिका | दोपहर 3:04 – शाम 4:36 |
| बुध, 18 सितंबर 2030 | षष्ठी | रोहिणी | दोपहर 12:00 – दोपहर 1:32 |
| गुरु, 19 सितंबर 2030 | सप्तमी | रोहिणी | दोपहर 1:31 – दोपहर 3:03 |
| शुक्र, 20 सितंबर 2030 | अष्टमी | मृगशिरा | सुबह 10:28 – सुबह 11:59 |
| शनि, 21 सितंबर 2030 | नवमी | आर्द्रा | सुबह 8:56 – सुबह 10:27 |
| रवि, 22 सितंबर 2030 | दशमी | पुनर्वसु | शाम 4:31 – शाम 6:02 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; सुबह 7:06 तक।
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र भरणी है; रात 12:31 तक।
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 7:24 – सुबह 8:56 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 16 सितंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:52 और सूर्यास्त शाम 6:09 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।