दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 30 जून 2030
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:15 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र मृगशिरा, योग गण्ड और करण चतुष्पद है। राहु काल शाम 5:20 – रात 7:04 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:15
- सूर्यास्त
- रात 7:04
- तिथि
- अमावस्या · रात 3:04 तक
- नक्षत्र
- मृगशिरा · सुबह 10:43 तक
- योग
- गण्ड
- करण
- चतुष्पद
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 5:20 – रात 7:04
- यमगंड
- दोपहर 12:09 – दोपहर 1:53
- गुलिक काल
- दोपहर 3:36 – शाम 5:20
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:35 – दोपहर 12:23
- अमृत काल
- दोपहर 1:01 – दोपहर 2:45
आज लखनऊ में
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:15 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र मृगशिरा, योग गण्ड और करण चतुष्पद है। राहु काल शाम 5:20 – रात 7:04 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 1 जुलाई 2030 | प्रतिपदा | आर्द्रा | सुबह 6:59 – सुबह 8:43 |
| मंगल, 2 जुलाई 2030 | द्वितीया | पुनर्वसु | दोपहर 3:37 – शाम 5:20 |
| बुध, 3 जुलाई 2030 | द्वितीया | पुष्य | दोपहर 12:10 – दोपहर 1:53 |
| गुरु, 4 जुलाई 2030 | तृतीया | आश्लेषा | दोपहर 1:53 – दोपहर 3:37 |
| शुक्र, 5 जुलाई 2030 | चतुर्थी | मघा | सुबह 10:27 – दोपहर 12:10 |
| शनि, 6 जुलाई 2030 | पंचमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 8:44 – सुबह 10:27 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि अमावस्या है; रात 3:04 तक।
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मृगशिरा है; सुबह 10:43 तक।
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल शाम 5:20 – रात 7:04 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 30 जून 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:15 और सूर्यास्त रात 7:04 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।