दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, मंगल, 30 अप्रैल 2030
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र रेवती, योग Vishkumbha और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:20 – शाम 4:59 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:29
- सूर्यास्त
- शाम 6:38
- तिथि
- त्रयोदशी · दोपहर 3:23 तक
- नक्षत्र
- रेवती · सुबह 7:37 तक
- योग
- Vishkumbha
- करण
- वणिज
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:20 – शाम 4:59
- यमगंड
- सुबह 8:46 – सुबह 10:25
- गुलिक काल
- दोपहर 12:03 – दोपहर 1:42
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- सुबह 7:57 – सुबह 9:35
आज लखनऊ में
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र रेवती, योग Vishkumbha और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:20 – शाम 4:59 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 1 मई 2030 | चतुर्दशी | रेवती | दोपहर 12:03 – दोपहर 1:42 |
| गुरु, 2 मई 2030 | अमावस्या | अश्विनी | दोपहर 1:42 – दोपहर 3:21 |
| शुक्र, 3 मई 2030 | प्रतिपदा | भरणी | सुबह 10:24 – दोपहर 12:03 |
| शनि, 4 मई 2030 | द्वितीया | कृत्तिका | सुबह 8:44 – सुबह 10:23 |
| रवि, 5 मई 2030 | तृतीया | रोहिणी | शाम 5:01 – शाम 6:41 |
| सोम, 6 मई 2030 | चतुर्थी | मृगशिरा | सुबह 7:04 – सुबह 8:43 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी है; दोपहर 3:23 तक।
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रेवती है; सुबह 7:37 तक।
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 3:20 – शाम 4:59 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 30 अप्रैल 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:29 और सूर्यास्त शाम 6:38 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।