दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, सोम, 21 जून 2032
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र विशाखा, योग शिव और करण कौलव है। राहु काल सुबह 6:34 – सुबह 8:15 है।
- सूर्योदय
- तड़के 4:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:23
- तिथि
- त्रयोदशी · रात 9:48 तक
- नक्षत्र
- विशाखा · तड़के 5:47 तक
- योग
- शिव
- करण
- कौलव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 6:34 – सुबह 8:15
- यमगंड
- सुबह 9:57 – सुबह 11:38
- गुलिक काल
- दोपहर 1:19 – दोपहर 3:01
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:04 – सुबह 11:52
- अमृत काल
- तड़के 5:43 – सुबह 7:24
आज कोलकाता में
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र विशाखा, योग शिव और करण कौलव है। राहु काल सुबह 6:34 – सुबह 8:15 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 22 जून 2032 | चतुर्दशी | ज्येष्ठा | दोपहर 3:01 – शाम 4:42 |
| बुध, 23 जून 2032 | पूर्णिमा | मूल | सुबह 11:38 – दोपहर 1:20 |
| गुरु, 24 जून 2032 | प्रतिपदा | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 1:20 – दोपहर 3:01 |
| शुक्र, 25 जून 2032 | द्वितीया | उत्तराषाढ़ा | सुबह 9:57 – सुबह 11:39 |
| शनि, 26 जून 2032 | तृतीया | श्रवण | सुबह 8:16 – सुबह 9:58 |
| रवि, 27 जून 2032 | पंचमी | धनिष्ठा | शाम 4:43 – शाम 6:24 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी है; रात 9:48 तक।
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र विशाखा है; तड़के 5:47 तक।
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 6:34 – सुबह 8:15 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 21 जून 2032 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 4:52 और सूर्यास्त शाम 6:23 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।