दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, रवि, 11 अप्रैल 2032
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:19 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र अश्विनी, योग Vishkumbha और करण बव है। राहु काल शाम 4:21 – शाम 5:55 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:19
- सूर्यास्त
- शाम 5:55
- तिथि
- प्रतिपदा · सुबह 6:11 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी · दोपहर 1:01 तक
- योग
- Vishkumbha
- करण
- बव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:21 – शाम 5:55
- यमगंड
- सुबह 11:37 – दोपहर 1:12
- गुलिक काल
- दोपहर 2:46 – शाम 4:21
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:06 – सुबह 11:54
- अमृत काल
- दोपहर 12:24 – दोपहर 1:59
आज कोलकाता में
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:19 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र अश्विनी, योग Vishkumbha और करण बव है। राहु काल शाम 4:21 – शाम 5:55 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 12 अप्रैल 2032 | तृतीया | भरणी | सुबह 6:53 – सुबह 8:28 |
| मंगल, 13 अप्रैल 2032 | चतुर्थी | कृत्तिका | दोपहर 2:46 – शाम 4:21 |
| बुध, 14 अप्रैल 2032 | पंचमी | रोहिणी | सुबह 11:36 – दोपहर 1:11 |
| गुरु, 15 अप्रैल 2032 | षष्ठी | मृगशिरा | दोपहर 1:11 – दोपहर 2:46 |
| शुक्र, 16 अप्रैल 2032 | षष्ठी | आर्द्रा | सुबह 10:01 – सुबह 11:36 |
| शनि, 17 अप्रैल 2032 | सप्तमी | पुनर्वसु | सुबह 8:25 – सुबह 10:00 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा है; सुबह 6:11 तक।
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अश्विनी है; दोपहर 1:01 तक।
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल शाम 4:21 – शाम 5:55 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 11 अप्रैल 2032 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:19 और सूर्यास्त शाम 5:55 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।