दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, सोम, 5 जनवरी 2032
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:17 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग सौभाग्य और करण बव है। राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 8:59 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:17
- सूर्यास्त
- शाम 5:05
- तिथि
- सप्तमी · दोपहर 3:00 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी · सुबह 6:41 तक
- योग
- सौभाग्य
- करण
- बव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:38 – सुबह 8:59
- यमगंड
- सुबह 10:20 – सुबह 11:41
- गुलिक काल
- दोपहर 1:02 – दोपहर 2:23
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:14 – दोपहर 12:02
- अमृत काल
- सुबह 6:58 – सुबह 8:19
आज कोलकाता में
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:17 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग सौभाग्य और करण बव है। राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 8:59 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 6 जनवरी 2032 | अष्टमी | हस्त | दोपहर 2:24 – दोपहर 3:45 |
| बुध, 7 जनवरी 2032 | नवमी | चित्रा | सुबह 11:42 – दोपहर 1:03 |
| गुरु, 8 जनवरी 2032 | दशमी | स्वाती | दोपहर 1:04 – दोपहर 2:25 |
| शुक्र, 9 जनवरी 2032 | एकादशी | विशाखा | सुबह 10:22 – सुबह 11:43 |
| शनि, 10 जनवरी 2032 | द्वादशी | अनुराधा | सुबह 9:01 – सुबह 10:22 |
| रवि, 11 जनवरी 2032 | त्रयोदशी | मूल | दोपहर 3:48 – शाम 5:09 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; दोपहर 3:00 तक।
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है; सुबह 6:41 तक।
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 8:59 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 5 जनवरी 2032 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:17 और सूर्यास्त शाम 5:05 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।