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दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, गुरु, 23 अक्टूबर 2031

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग सुकर्मा और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 12:46 – दोपहर 2:13 है।

सूर्योदय
तड़के 5:36
सूर्यास्त
शाम 5:05
तिथि
अष्टमी · रात 12:00 तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा · रात 8:53 तक
योग
सुकर्मा
करण
विष्टि
वार
गुरुवार
राहु काल
दोपहर 12:46 – दोपहर 2:13
यमगंड
तड़के 5:36 – सुबह 7:02
गुलिक काल
सुबह 8:28 – सुबह 9:54
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 10:52 – सुबह 11:40
अमृत काल
सुबह 10:37 – दोपहर 12:03

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आज कोलकाता में

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग सुकर्मा और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 12:46 – दोपहर 2:13 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
शुक्र, 24 अक्टूबर 2031नवमीश्रवणसुबह 9:54 – सुबह 11:20
शनि, 25 अक्टूबर 2031दशमीधनिष्ठासुबह 8:28 – सुबह 9:54
रवि, 26 अक्टूबर 2031एकादशीशतभिषादोपहर 3:37 – शाम 5:03
सोम, 27 अक्टूबर 2031द्वादशीपूर्वा भाद्रपदसुबह 7:03 – सुबह 8:29
मंगल, 28 अक्टूबर 2031त्रयोदशीउत्तरा भाद्रपददोपहर 2:10 – दोपहर 3:36
बुध, 29 अक्टूबर 2031चतुर्दशीरेवतीसुबह 11:20 – दोपहर 12:45

सामान्य प्रश्न

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि अष्टमी है; रात 12:00 तक।

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है; रात 8:53 तक।

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल दोपहर 12:46 – दोपहर 2:13 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

गुरु, 23 अक्टूबर 2031 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय तड़के 5:36 और सूर्यास्त शाम 5:05 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।