दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, रवि, 4 मई 2031
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:02 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग व्याघात और करण बालव है। राहु काल शाम 4:26 – शाम 6:04 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:02
- सूर्यास्त
- शाम 6:04
- तिथि
- द्वादशी · दोपहर 3:09 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी · सुबह 9:00 तक
- योग
- व्याघात
- करण
- बालव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:26 – शाम 6:04
- यमगंड
- सुबह 11:33 – दोपहर 1:11
- गुलिक काल
- दोपहर 2:49 – शाम 4:26
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:00 – सुबह 11:48
- अमृत काल
- दोपहर 12:22 – दोपहर 2:00
आज कोलकाता में
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:02 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग व्याघात और करण बालव है। राहु काल शाम 4:26 – शाम 6:04 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 5 मई 2031 | त्रयोदशी | हस्त | सुबह 6:39 – सुबह 8:17 |
| मंगल, 6 मई 2031 | चतुर्दशी | चित्रा | दोपहर 2:49 – शाम 4:27 |
| बुध, 7 मई 2031 | पूर्णिमा | स्वाती | सुबह 11:33 – दोपहर 1:11 |
| गुरु, 8 मई 2031 | प्रतिपदा | अनुराधा | दोपहर 1:11 – दोपहर 2:49 |
| शुक्र, 9 मई 2031 | तृतीया | ज्येष्ठा | सुबह 9:54 – सुबह 11:33 |
| शनि, 10 मई 2031 | चतुर्थी | मूल | सुबह 8:16 – सुबह 9:54 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; दोपहर 3:09 तक।
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है; सुबह 9:00 तक।
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल शाम 4:26 – शाम 6:04 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 4 मई 2031 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:02 और सूर्यास्त शाम 6:04 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।