सामग्री पर जाएँ

दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, मंगल, 4 फ़रवरी 2031

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र आर्द्रा, योग Vishkumbha और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:38 – शाम 4:02 है।

सूर्योदय
सुबह 6:14
सूर्यास्त
शाम 5:26
तिथि
द्वादशी · दोपहर 12:35 तक
नक्षत्र
आर्द्रा · रात 10:44 तक
योग
Vishkumbha
करण
बालव
वार
मंगलवार
राहु काल
दोपहर 2:38 – शाम 4:02
यमगंड
सुबह 9:02 – सुबह 10:26
गुलिक काल
सुबह 11:50 – दोपहर 1:14
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:22 – दोपहर 12:10
अमृत काल
सुबह 8:20 – सुबह 9:44

पूरा पंचांग खोलें

आज कोलकाता में

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र आर्द्रा, योग Vishkumbha और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:38 – शाम 4:02 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
बुध, 5 फ़रवरी 2031त्रयोदशीपुनर्वसुसुबह 11:50 – दोपहर 1:14
गुरु, 6 फ़रवरी 2031चतुर्दशीपुष्यदोपहर 1:14 – दोपहर 2:39
शुक्र, 7 फ़रवरी 2031पूर्णिमाआश्लेषासुबह 10:26 – सुबह 11:50
शनि, 8 फ़रवरी 2031प्रतिपदामघासुबह 9:01 – सुबह 10:26
रवि, 9 फ़रवरी 2031द्वितीयामघाशाम 4:04 – शाम 5:29
सोम, 10 फ़रवरी 2031तृतीयापूर्वा फाल्गुनीसुबह 7:36 – सुबह 9:01

सामान्य प्रश्न

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; दोपहर 12:35 तक।

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र आर्द्रा है; रात 10:44 तक।

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल दोपहर 2:38 – शाम 4:02 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

मंगल, 4 फ़रवरी 2031 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय सुबह 6:14 और सूर्यास्त शाम 5:26 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।