दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, बुध, 4 दिसंबर 2030
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:01 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग वज्र और करण गर है। राहु काल सुबह 11:26 – दोपहर 12:47 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:01
- सूर्यास्त
- शाम 4:51
- तिथि
- दशमी · शाम 5:18 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपद · दोपहर 2:35 तक
- योग
- वज्र
- करण
- गर
- वार
- बुधवार
- राहु काल
- सुबह 11:26 – दोपहर 12:47
- यमगंड
- सुबह 7:22 – सुबह 8:44
- गुलिक काल
- सुबह 10:05 – सुबह 11:26
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 10:59 – सुबह 11:47
- अमृत काल
- सुबह 9:24 – सुबह 10:45
आज कोलकाता में
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:01 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग वज्र और करण गर है। राहु काल सुबह 11:26 – दोपहर 12:47 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| गुरु, 5 दिसंबर 2030 | एकादशी | रेवती | दोपहर 12:48 – दोपहर 2:09 |
| शुक्र, 6 दिसंबर 2030 | द्वादशी | अश्विनी | सुबह 10:06 – सुबह 11:27 |
| शनि, 7 दिसंबर 2030 | त्रयोदशी | भरणी | सुबह 8:45 – सुबह 10:06 |
| रवि, 8 दिसंबर 2030 | चतुर्दशी | कृत्तिका | दोपहर 3:31 – शाम 4:52 |
| सोम, 9 दिसंबर 2030 | पूर्णिमा | रोहिणी | सुबह 7:25 – सुबह 8:46 |
| मंगल, 10 दिसंबर 2030 | प्रतिपदा | मृगशिरा | दोपहर 2:10 – दोपहर 3:31 |
सामान्य प्रश्न
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि दशमी है; शाम 5:18 तक।
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है; दोपहर 2:35 तक।
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 11:26 – दोपहर 12:47 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
बुध, 4 दिसंबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:01 और सूर्यास्त शाम 4:51 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।