दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, शुक्र, 11 अक्टूबर 2030
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र रेवती, योग ध्रुव और करण बव है। राहु काल सुबह 9:55 – सुबह 11:23 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:31
- सूर्यास्त
- शाम 5:14
- तिथि
- पूर्णिमा · शाम 4:16 तक
- नक्षत्र
- रेवती · तड़के 4:00 तक
- योग
- ध्रुव
- करण
- बव
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 9:55 – सुबह 11:23
- यमगंड
- दोपहर 2:19 – दोपहर 3:47
- गुलिक काल
- सुबह 6:59 – सुबह 8:27
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 10:53 – सुबह 11:41
- अमृत काल
- दोपहर 12:07 – दोपहर 1:35
आज कोलकाता में
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र रेवती, योग ध्रुव और करण बव है। राहु काल सुबह 9:55 – सुबह 11:23 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 12 अक्टूबर 2030 | प्रतिपदा | अश्विनी | सुबह 8:27 – सुबह 9:55 |
| रवि, 13 अक्टूबर 2030 | द्वितीया | अश्विनी | दोपहर 3:45 – शाम 5:13 |
| सोम, 14 अक्टूबर 2030 | तृतीया | भरणी | सुबह 7:00 – सुबह 8:27 |
| मंगल, 15 अक्टूबर 2030 | चतुर्थी | कृत्तिका | दोपहर 2:16 – दोपहर 3:44 |
| बुध, 16 अक्टूबर 2030 | पंचमी | रोहिणी | सुबह 11:21 – दोपहर 12:49 |
| गुरु, 17 अक्टूबर 2030 | षष्ठी | मृगशिरा | दोपहर 12:48 – दोपहर 2:15 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; शाम 4:16 तक।
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रेवती है; तड़के 4:00 तक।
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 9:55 – सुबह 11:23 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 11 अक्टूबर 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:31 और सूर्यास्त शाम 5:14 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।