दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, रवि, 25 अगस्त 2030
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग वज्र और करण कौलव है। राहु काल शाम 4:24 – शाम 6:00 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:16
- सूर्यास्त
- शाम 6:00
- तिथि
- द्वादशी · तड़के 4:17 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · तड़के 5:54 तक
- योग
- वज्र
- करण
- कौलव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:24 – शाम 6:00
- यमगंड
- सुबह 11:38 – दोपहर 1:13
- गुलिक काल
- दोपहर 2:49 – शाम 4:24
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:06 – सुबह 11:54
- अमृत काल
- दोपहर 12:26 – दोपहर 2:01
आज कोलकाता में
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग वज्र और करण कौलव है। राहु काल शाम 4:24 – शाम 6:00 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 26 अगस्त 2030 | त्रयोदशी | पुनर्वसु | सुबह 6:52 – सुबह 8:27 |
| मंगल, 27 अगस्त 2030 | चतुर्दशी | पुष्य | दोपहर 2:48 – शाम 4:23 |
| बुध, 28 अगस्त 2030 | अमावस्या | आश्लेषा | सुबह 11:37 – दोपहर 1:12 |
| गुरु, 29 अगस्त 2030 | प्रतिपदा | मघा | दोपहर 1:12 – दोपहर 2:46 |
| शुक्र, 30 अगस्त 2030 | द्वितीया | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 10:02 – सुबह 11:37 |
| शनि, 31 अगस्त 2030 | तृतीया | उत्तरा फाल्गुनी | सुबह 8:27 – सुबह 10:02 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; तड़के 4:17 तक।
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; तड़के 5:54 तक।
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल शाम 4:24 – शाम 6:00 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 25 अगस्त 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:16 और सूर्यास्त शाम 6:00 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।