दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, मंगल, 2 जुलाई 2030
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पुनर्वसु, योग ध्रुव और करण बालव है। राहु काल दोपहर 3:02 – शाम 4:44 है।
- सूर्योदय
- तड़के 4:55
- सूर्यास्त
- शाम 6:25
- तिथि
- द्वितीया · सुबह 6:03 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · दोपहर 3:25 तक
- योग
- ध्रुव
- करण
- बालव
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:02 – शाम 4:44
- यमगंड
- सुबह 8:18 – सुबह 9:59
- गुलिक काल
- सुबह 11:40 – दोपहर 1:21
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:06 – सुबह 11:54
- अमृत काल
- सुबह 7:27 – सुबह 9:08
आज कोलकाता में
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पुनर्वसु, योग ध्रुव और करण बालव है। राहु काल दोपहर 3:02 – शाम 4:44 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 3 जुलाई 2030 | द्वितीया | पुष्य | सुबह 11:40 – दोपहर 1:21 |
| गुरु, 4 जुलाई 2030 | तृतीया | आश्लेषा | दोपहर 1:22 – दोपहर 3:03 |
| शुक्र, 5 जुलाई 2030 | चतुर्थी | मघा | सुबह 10:00 – सुबह 11:41 |
| शनि, 6 जुलाई 2030 | पंचमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 8:19 – सुबह 10:00 |
| रवि, 7 जुलाई 2030 | षष्ठी | उत्तरा फाल्गुनी | शाम 4:44 – शाम 6:25 |
| सोम, 8 जुलाई 2030 | अष्टमी | हस्त | सुबह 6:38 – सुबह 8:19 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; सुबह 6:03 तक।
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; दोपहर 3:25 तक।
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल दोपहर 3:02 – शाम 4:44 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 2 जुलाई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 4:55 और सूर्यास्त शाम 6:25 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।