दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, मंगल, 18 जून 2030
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग ब्रह्म और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:00 – शाम 4:41 है।
- सूर्योदय
- तड़के 4:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:23
- तिथि
- तृतीया · दोपहर 2:42 तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा · शाम 4:30 तक
- योग
- ब्रह्म
- करण
- विष्टि
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:00 – शाम 4:41
- यमगंड
- सुबह 8:14 – सुबह 9:56
- गुलिक काल
- सुबह 11:37 – दोपहर 1:19
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:03 – सुबह 11:51
- अमृत काल
- सुबह 7:24 – सुबह 9:05
आज कोलकाता में
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग ब्रह्म और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:00 – शाम 4:41 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 19 जून 2030 | चतुर्थी | श्रवण | सुबह 11:37 – दोपहर 1:19 |
| गुरु, 20 जून 2030 | पंचमी | धनिष्ठा | दोपहर 1:19 – दोपहर 3:00 |
| शुक्र, 21 जून 2030 | षष्ठी | शतभिषा | सुबह 9:56 – सुबह 11:38 |
| शनि, 22 जून 2030 | सप्तमी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 8:15 – सुबह 9:57 |
| रवि, 23 जून 2030 | अष्टमी | उत्तरा भाद्रपद | शाम 4:42 – शाम 6:24 |
| सोम, 24 जून 2030 | नवमी | रेवती | सुबह 6:34 – सुबह 8:16 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; दोपहर 2:42 तक।
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है; शाम 4:30 तक।
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल दोपहर 3:00 – शाम 4:41 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 18 जून 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 4:52 और सूर्यास्त शाम 6:23 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।