दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, मंगल, 28 मई 2030
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र रेवती, योग प्रीति और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:54 – शाम 4:35 है।
- सूर्योदय
- तड़के 4:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:15
- तिथि
- द्वादशी · तड़के 4:15 तक
- नक्षत्र
- रेवती · दोपहर 1:27 तक
- योग
- प्रीति
- करण
- कौलव
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 2:54 – शाम 4:35
- यमगंड
- सुबह 8:13 – सुबह 9:53
- गुलिक काल
- सुबह 11:33 – दोपहर 1:14
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:00 – सुबह 11:48
- अमृत काल
- सुबह 7:22 – सुबह 9:03
आज कोलकाता में
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 4:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र रेवती, योग प्रीति और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:54 – शाम 4:35 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 29 मई 2030 | त्रयोदशी | अश्विनी | सुबह 11:34 – दोपहर 1:14 |
| गुरु, 30 मई 2030 | त्रयोदशी | भरणी | दोपहर 1:14 – दोपहर 2:55 |
| शुक्र, 31 मई 2030 | चतुर्दशी | कृत्तिका | सुबह 9:53 – सुबह 11:34 |
| शनि, 1 जून 2030 | अमावस्या | रोहिणी | सुबह 8:13 – सुबह 9:53 |
| रवि, 2 जून 2030 | प्रतिपदा | मृगशिरा | शाम 4:36 – शाम 6:17 |
| सोम, 3 जून 2030 | द्वितीया | आर्द्रा | सुबह 6:32 – सुबह 8:13 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; तड़के 4:15 तक।
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रेवती है; दोपहर 1:27 तक।
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल दोपहर 2:54 – शाम 4:35 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 28 मई 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 4:52 और सूर्यास्त शाम 6:15 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।