दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, रवि, 3 मार्च 2030
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र धनिष्ठा, योग परिघ और करण शकुनि है। राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:40 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:56
- सूर्यास्त
- शाम 5:40
- तिथि
- चतुर्दशी · दोपहर 12:01 तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा · दोपहर 12:26 तक
- योग
- परिघ
- करण
- शकुनि
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:12 – शाम 5:40
- यमगंड
- सुबह 11:48 – दोपहर 1:16
- गुलिक काल
- दोपहर 2:44 – शाम 4:12
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:19 – दोपहर 12:07
- अमृत काल
- दोपहर 12:32 – दोपहर 2:00
आज कोलकाता में
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:56 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र धनिष्ठा, योग परिघ और करण शकुनि है। राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:40 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 4 मार्च 2030 | अमावस्या | शतभिषा | सुबह 7:23 – सुबह 8:51 |
| मंगल, 5 मार्च 2030 | प्रतिपदा | पूर्वा भाद्रपद | दोपहर 2:44 – शाम 4:13 |
| बुध, 6 मार्च 2030 | द्वितीया | उत्तरा भाद्रपद | सुबह 11:47 – दोपहर 1:16 |
| गुरु, 7 मार्च 2030 | तृतीया | रेवती | दोपहर 1:16 – दोपहर 2:45 |
| शुक्र, 8 मार्च 2030 | चतुर्थी | अश्विनी | सुबह 10:18 – सुबह 11:47 |
| शनि, 9 मार्च 2030 | पंचमी | भरणी | सुबह 8:49 – सुबह 10:18 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी है; दोपहर 12:01 तक।
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र धनिष्ठा है; दोपहर 12:26 तक।
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:40 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 3 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:56 और सूर्यास्त शाम 5:40 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।