दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, सोम, 18 फ़रवरी 2030
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:06 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र मघा, योग शोभन और करण बव है। राहु काल सुबह 7:32 – सुबह 8:58 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:06
- सूर्यास्त
- शाम 5:34
- तिथि
- पूर्णिमा · सुबह 11:50 तक
- नक्षत्र
- मघा · रात 1:35 तक
- योग
- शोभन
- करण
- बव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:32 – सुबह 8:58
- यमगंड
- सुबह 10:24 – सुबह 11:50
- गुलिक काल
- दोपहर 1:16 – दोपहर 2:42
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:21 – दोपहर 12:09
- अमृत काल
- सुबह 6:49 – सुबह 8:15
आज कोलकाता में
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:06 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र मघा, योग शोभन और करण बव है। राहु काल सुबह 7:32 – सुबह 8:58 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 19 फ़रवरी 2030 | प्रतिपदा | पूर्वा फाल्गुनी | दोपहर 2:42 – शाम 4:09 |
| बुध, 20 फ़रवरी 2030 | द्वितीया | उत्तरा फाल्गुनी | सुबह 11:50 – दोपहर 1:16 |
| गुरु, 21 फ़रवरी 2030 | तृतीया | हस्त | दोपहर 1:16 – दोपहर 2:43 |
| शुक्र, 22 फ़रवरी 2030 | पंचमी | चित्रा | सुबह 10:23 – सुबह 11:50 |
| शनि, 23 फ़रवरी 2030 | षष्ठी | स्वाती | सुबह 8:56 – सुबह 10:23 |
| रवि, 24 फ़रवरी 2030 | सप्तमी | विशाखा | शाम 4:10 – शाम 5:37 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; सुबह 11:50 तक।
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मघा है; रात 1:35 तक।
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 7:32 – सुबह 8:58 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 18 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:06 और सूर्यास्त शाम 5:34 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।