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दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, सोम, 4 फ़रवरी 2030

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र शतभिषा, योग व्यतीपात और करण बालव है। राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 9:02 है।

सूर्योदय
सुबह 6:14
सूर्यास्त
शाम 5:26
तिथि
द्वितीया · रात 8:26 तक
नक्षत्र
शतभिषा · तड़के 4:39 तक
योग
व्यतीपात
करण
बालव
वार
सोमवार
राहु काल
सुबह 7:38 – सुबह 9:02
यमगंड
सुबह 10:26 – सुबह 11:50
गुलिक काल
दोपहर 1:14 – दोपहर 2:38
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:22 – दोपहर 12:10
अमृत काल
सुबह 6:56 – सुबह 8:20

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आज कोलकाता में

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र शतभिषा, योग व्यतीपात और करण बालव है। राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 9:02 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
मंगल, 5 फ़रवरी 2030तृतीयापूर्वा भाद्रपददोपहर 2:38 – शाम 4:03
बुध, 6 फ़रवरी 2030चतुर्थीपूर्वा भाद्रपदसुबह 11:50 – दोपहर 1:14
गुरु, 7 फ़रवरी 2030पंचमीउत्तरा भाद्रपददोपहर 1:15 – दोपहर 2:39
शुक्र, 8 फ़रवरी 2030षष्ठीरेवतीसुबह 10:26 – सुबह 11:50
शनि, 9 फ़रवरी 2030सप्तमीअश्विनीसुबह 9:01 – सुबह 10:26
रवि, 10 फ़रवरी 2030अष्टमीभरणीशाम 4:05 – शाम 5:30

सामान्य प्रश्न

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; रात 8:26 तक।

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र शतभिषा है; तड़के 4:39 तक।

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल सुबह 7:38 – सुबह 9:02 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

सोम, 4 फ़रवरी 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय सुबह 6:14 और सूर्यास्त शाम 5:26 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।