दैनिक पंचांग
हैदराबाद पंचांग, गुरु, 31 अक्टूबर 2030
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र मूल, योग अतिगण्ड और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:25 – दोपहर 2:52 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:14
- सूर्यास्त
- शाम 5:45
- तिथि
- पंचमी · सुबह 10:25 तक
- नक्षत्र
- मूल · सुबह 10:06 तक
- योग
- अतिगण्ड
- करण
- बालव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:25 – दोपहर 2:52
- यमगंड
- सुबह 6:14 – सुबह 7:40
- गुलिक काल
- सुबह 9:06 – सुबह 10:33
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- सुबह 11:16 – दोपहर 12:42
आज हैदराबाद में
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय सुबह 6:14 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र मूल, योग अतिगण्ड और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:25 – दोपहर 2:52 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल हैदराबाद के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 1 नवंबर 2030 | षष्ठी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 10:33 – सुबह 11:59 |
| शनि, 2 नवंबर 2030 | सप्तमी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 9:07 – सुबह 10:33 |
| रवि, 3 नवंबर 2030 | नवमी | श्रवण | शाम 4:17 – शाम 5:43 |
| सोम, 4 नवंबर 2030 | दशमी | धनिष्ठा | सुबह 7:41 – सुबह 9:07 |
| मंगल, 5 नवंबर 2030 | एकादशी | शतभिषा | दोपहर 2:51 – शाम 4:17 |
| बुध, 6 नवंबर 2030 | द्वादशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 11:59 – दोपहर 1:25 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; सुबह 10:25 तक।
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मूल है; सुबह 10:06 तक।
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में राहु काल कब है?
हैदराबाद में राहु काल दोपहर 1:25 – दोपहर 2:52 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 31 अक्टूबर 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:14 और सूर्यास्त शाम 5:45 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।