दैनिक पंचांग
हैदराबाद पंचांग, शनि, 1 जून 2030
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय तड़के 5:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र रोहिणी, योग अतिगण्ड और करण नाग है। राहु काल सुबह 8:57 – सुबह 10:35 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:40
- सूर्यास्त
- शाम 6:46
- तिथि
- अमावस्या · सुबह 11:51 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी · रात 1:38 तक
- योग
- अतिगण्ड
- करण
- नाग
- वार
- शनिवार
- राहु काल
- सुबह 8:57 – सुबह 10:35
- यमगंड
- दोपहर 1:52 – दोपहर 3:30
- गुलिक काल
- तड़के 5:40 – सुबह 7:19
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:41 – दोपहर 12:29
- अमृत काल
- दोपहर 2:41 – शाम 4:19
आज हैदराबाद में
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय तड़के 5:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र रोहिणी, योग अतिगण्ड और करण नाग है। राहु काल सुबह 8:57 – सुबह 10:35 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल हैदराबाद के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| रवि, 2 जून 2030 | प्रतिपदा | मृगशिरा | शाम 5:08 – शाम 6:47 |
| सोम, 3 जून 2030 | द्वितीया | आर्द्रा | सुबह 7:19 – सुबह 8:57 |
| मंगल, 4 जून 2030 | तृतीया | आर्द्रा | दोपहर 3:31 – शाम 5:09 |
| बुध, 5 जून 2030 | चतुर्थी | पुनर्वसु | दोपहर 12:14 – दोपहर 1:53 |
| गुरु, 6 जून 2030 | पंचमी | पुष्य | दोपहर 1:53 – दोपहर 3:31 |
| शुक्र, 7 जून 2030 | षष्ठी | आश्लेषा | सुबह 10:36 – दोपहर 12:14 |
सामान्य प्रश्न
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि अमावस्या है; सुबह 11:51 तक।
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रोहिणी है; रात 1:38 तक।
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में राहु काल कब है?
हैदराबाद में राहु काल सुबह 8:57 – सुबह 10:35 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शनि, 1 जून 2030 को हैदराबाद में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:40 और सूर्यास्त शाम 6:46 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।