दैनिक पंचांग
दिल्ली पंचांग, शनि, 27 मार्च 2032
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र हस्त, योग गण्ड और करण बव है। राहु काल सुबह 9:21 – सुबह 10:54 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:16
- सूर्यास्त
- शाम 6:36
- तिथि
- पूर्णिमा · सुबह 6:16 तक
- नक्षत्र
- हस्त · रात 2:53 तक
- योग
- गण्ड
- करण
- बव
- वार
- शनिवार
- राहु काल
- सुबह 9:21 – सुबह 10:54
- यमगंड
- दोपहर 1:59 – दोपहर 3:31
- गुलिक काल
- सुबह 6:16 – सुबह 7:49
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:55 – दोपहर 12:43
- अमृत काल
- दोपहर 2:45 – शाम 4:17
आज दिल्ली में
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र हस्त, योग गण्ड और करण बव है। राहु काल सुबह 9:21 – सुबह 10:54 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल दिल्ली के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| रवि, 28 मार्च 2032 | प्रतिपदा | चित्रा | शाम 5:04 – शाम 6:37 |
| सोम, 29 मार्च 2032 | द्वितीया | स्वाती | सुबह 7:47 – सुबह 9:20 |
| मंगल, 30 मार्च 2032 | तृतीया | विशाखा | दोपहर 3:31 – शाम 5:05 |
| बुध, 31 मार्च 2032 | चतुर्थी | विशाखा | दोपहर 12:25 – दोपहर 1:58 |
| गुरु, 1 अप्रैल 2032 | पंचमी | अनुराधा | दोपहर 1:58 – दोपहर 3:32 |
| शुक्र, 2 अप्रैल 2032 | षष्ठी | मूल | सुबह 10:51 – दोपहर 12:24 |
सामान्य प्रश्न
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; सुबह 6:16 तक।
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र हस्त है; रात 2:53 तक।
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल सुबह 9:21 – सुबह 10:54 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शनि, 27 मार्च 2032 को दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:16 और सूर्यास्त शाम 6:36 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।