दैनिक पंचांग
दिल्ली पंचांग, गुरु, 1 अगस्त 2030
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में सूर्योदय तड़के 5:42 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र मघा, योग व्यतीपात और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:08 – दोपहर 3:49 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:42
- सूर्यास्त
- रात 7:12
- तिथि
- द्वितीया · शाम 5:01 तक
- नक्षत्र
- मघा · रात 12:56 तक
- योग
- व्यतीपात
- करण
- कौलव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 2:08 – दोपहर 3:49
- यमगंड
- तड़के 5:42 – सुबह 7:23
- गुलिक काल
- सुबह 9:04 – सुबह 10:46
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:53 – दोपहर 12:41
- अमृत काल
- सुबह 11:36 – दोपहर 1:17
आज दिल्ली में
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में सूर्योदय तड़के 5:42 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र मघा, योग व्यतीपात और करण कौलव है। राहु काल दोपहर 2:08 – दोपहर 3:49 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल दिल्ली के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 2 अगस्त 2030 | तृतीया | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 10:46 – दोपहर 12:27 |
| शनि, 3 अगस्त 2030 | चतुर्थी | उत्तरा फाल्गुनी | सुबह 9:05 – सुबह 10:46 |
| रवि, 4 अगस्त 2030 | पंचमी | हस्त | शाम 5:29 – रात 7:09 |
| सोम, 5 अगस्त 2030 | षष्ठी | चित्रा | सुबह 7:25 – सुबह 9:05 |
| मंगल, 6 अगस्त 2030 | सप्तमी | स्वाती | दोपहर 3:47 – शाम 5:28 |
| बुध, 7 अगस्त 2030 | अष्टमी | विशाखा | दोपहर 12:26 – दोपहर 2:07 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; शाम 5:01 तक।
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मघा है; रात 12:56 तक।
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल दोपहर 2:08 – दोपहर 3:49 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 1 अगस्त 2030 को दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:42 और सूर्यास्त रात 7:12 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।