दैनिक पंचांग
चेन्नई पंचांग, मंगल, 6 अगस्त 2030
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में सूर्योदय तड़के 5:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र स्वाती, योग साध्य और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:24 – शाम 4:59 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:55
- सूर्यास्त
- शाम 6:34
- तिथि
- सप्तमी · सुबह 11:11 तक
- नक्षत्र
- स्वाती · रात 10:14 तक
- योग
- साध्य
- करण
- वणिज
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:24 – शाम 4:59
- यमगंड
- सुबह 9:05 – सुबह 10:39
- गुलिक काल
- दोपहर 12:14 – दोपहर 1:49
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:43 – दोपहर 12:31
- अमृत काल
- सुबह 8:17 – सुबह 9:52
आज चेन्नई में
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में सूर्योदय तड़के 5:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र स्वाती, योग साध्य और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:24 – शाम 4:59 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल चेन्नई के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 7 अगस्त 2030 | अष्टमी | विशाखा | दोपहर 12:14 – दोपहर 1:49 |
| गुरु, 8 अगस्त 2030 | नवमी | अनुराधा | दोपहर 1:49 – दोपहर 3:23 |
| शुक्र, 9 अगस्त 2030 | एकादशी | ज्येष्ठा | सुबह 10:39 – दोपहर 12:14 |
| शनि, 10 अगस्त 2030 | द्वादशी | मूल | सुबह 9:05 – सुबह 10:39 |
| रवि, 11 अगस्त 2030 | त्रयोदशी | पूर्वाषाढ़ा | शाम 4:57 – शाम 6:32 |
| सोम, 12 अगस्त 2030 | चतुर्दशी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 7:30 – सुबह 9:05 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; सुबह 11:11 तक।
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र स्वाती है; रात 10:14 तक।
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में राहु काल कब है?
चेन्नई में राहु काल दोपहर 3:24 – शाम 4:59 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 6 अगस्त 2030 को चेन्नई में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:55 और सूर्यास्त शाम 6:34 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।