दैनिक पंचांग
भोपाल पंचांग, गुरु, 13 फ़रवरी 2031
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:54 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र चित्रा, योग शूल और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:24 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:54
- सूर्यास्त
- शाम 6:14
- तिथि
- षष्ठी · शाम 6:23 तक
- नक्षत्र
- चित्रा · सुबह 8:21 तक
- योग
- शूल
- करण
- गर
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:59 – दोपहर 3:24
- यमगंड
- सुबह 6:54 – सुबह 8:19
- गुलिक काल
- सुबह 9:44 – सुबह 11:09
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:06 – दोपहर 12:54
- अमृत काल
- सुबह 11:52 – दोपहर 1:17
आज भोपाल में
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:54 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र चित्रा, योग शूल और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:24 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल भोपाल के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 14 फ़रवरी 2031 | सप्तमी | स्वाती | सुबह 11:09 – दोपहर 12:34 |
| शनि, 15 फ़रवरी 2031 | अष्टमी | विशाखा | सुबह 9:43 – सुबह 11:09 |
| रवि, 16 फ़रवरी 2031 | नवमी | अनुराधा | शाम 4:51 – शाम 6:16 |
| सोम, 17 फ़रवरी 2031 | दशमी | मूल | सुबह 8:17 – सुबह 9:43 |
| मंगल, 18 फ़रवरी 2031 | एकादशी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 3:26 – शाम 4:51 |
| बुध, 19 फ़रवरी 2031 | द्वादशी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 12:34 – दोपहर 2:00 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि षष्ठी है; शाम 6:23 तक।
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र चित्रा है; सुबह 8:21 तक।
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में राहु काल कब है?
भोपाल में राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:24 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 13 फ़रवरी 2031 को भोपाल में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:54 और सूर्यास्त शाम 6:14 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।