दैनिक पंचांग
भोपाल पंचांग, सोम, 7 जनवरी 2030
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 7:03 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र धनिष्ठा, योग वज्र और करण वणिज है। राहु काल सुबह 8:24 – सुबह 9:44 है।
- सूर्योदय
- सुबह 7:03
- सूर्यास्त
- शाम 5:49
- तिथि
- चतुर्थी · रात 3:06 तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा · शाम 6:29 तक
- योग
- वज्र
- करण
- वणिज
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 8:24 – सुबह 9:44
- यमगंड
- सुबह 11:05 – दोपहर 12:26
- गुलिक काल
- दोपहर 1:47 – दोपहर 3:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:59 – दोपहर 12:47
- अमृत काल
- सुबह 7:43 – सुबह 9:04
आज भोपाल में
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 7:03 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र धनिष्ठा, योग वज्र और करण वणिज है। राहु काल सुबह 8:24 – सुबह 9:44 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल भोपाल के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 8 जनवरी 2030 | पंचमी | शतभिषा | दोपहर 3:08 – शाम 4:29 |
| बुध, 9 जनवरी 2030 | षष्ठी | पूर्वा भाद्रपद | दोपहर 12:27 – दोपहर 1:48 |
| गुरु, 10 जनवरी 2030 | सप्तमी | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 1:48 – दोपहर 3:09 |
| शुक्र, 11 जनवरी 2030 | सप्तमी | रेवती | सुबह 11:07 – दोपहर 12:28 |
| शनि, 12 जनवरी 2030 | अष्टमी | अश्विनी | सुबह 9:46 – सुबह 11:07 |
| रवि, 13 जनवरी 2030 | नवमी | भरणी | शाम 4:32 – शाम 5:54 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी है; रात 3:06 तक।
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र धनिष्ठा है; शाम 6:29 तक।
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में राहु काल कब है?
भोपाल में राहु काल सुबह 8:24 – सुबह 9:44 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 7 जनवरी 2030 को भोपाल में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 7:03 और सूर्यास्त शाम 5:49 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।