दैनिक पंचांग
भोपाल पंचांग, रवि, 25 नवंबर 2029
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग साध्य और करण बालव है। राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:33 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:40
- सूर्यास्त
- शाम 5:33
- तिथि
- चतुर्थी · शाम 5:05 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · तड़के 4:48 तक
- योग
- साध्य
- करण
- बालव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:12 – शाम 5:33
- यमगंड
- दोपहर 12:07 – दोपहर 1:28
- गुलिक काल
- दोपहर 2:50 – शाम 4:12
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:40 – दोपहर 12:28
- अमृत काल
- दोपहर 12:48 – दोपहर 2:09
आज भोपाल में
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग साध्य और करण बालव है। राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:33 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल भोपाल के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 26 नवंबर 2029 | पंचमी | पुष्य | सुबह 8:03 – सुबह 9:24 |
| मंगल, 27 नवंबर 2029 | षष्ठी | पुष्य | दोपहर 2:50 – शाम 4:12 |
| बुध, 28 नवंबर 2029 | सप्तमी | आश्लेषा | दोपहर 12:08 – दोपहर 1:29 |
| गुरु, 29 नवंबर 2029 | अष्टमी | मघा | दोपहर 1:29 – दोपहर 2:51 |
| शुक्र, 30 नवंबर 2029 | नवमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 10:47 – दोपहर 12:08 |
| शनि, 1 दिसंबर 2029 | दशमी | हस्त | सुबह 9:27 – सुबह 10:48 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी है; शाम 5:05 तक।
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; तड़के 4:48 तक।
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में राहु काल कब है?
भोपाल में राहु काल शाम 4:12 – शाम 5:33 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 25 नवंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:40 और सूर्यास्त शाम 5:33 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।