दैनिक पंचांग
भोपाल पंचांग, गुरु, 27 सितंबर 2029
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:10 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र कृत्तिका, योग हर्षण और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:10
- सूर्यास्त
- शाम 6:11
- तिथि
- चतुर्थी · सुबह 7:20 तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका · सुबह 7:42 तक
- योग
- हर्षण
- करण
- बालव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11
- यमगंड
- सुबह 6:10 – सुबह 7:40
- गुलिक काल
- सुबह 9:10 – सुबह 10:41
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:41 – दोपहर 12:29
- अमृत काल
- सुबह 11:26 – दोपहर 12:56
आज भोपाल में
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय सुबह 6:10 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र कृत्तिका, योग हर्षण और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल भोपाल के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 28 सितंबर 2029 | पंचमी | कृत्तिका | सुबह 10:40 – दोपहर 12:10 |
| शनि, 29 सितंबर 2029 | षष्ठी | रोहिणी | सुबह 9:10 – सुबह 10:40 |
| रवि, 30 सितंबर 2029 | सप्तमी | मृगशिरा | शाम 4:38 – शाम 6:08 |
| सोम, 1 अक्टूबर 2029 | अष्टमी | आर्द्रा | सुबह 7:41 – सुबह 9:10 |
| मंगल, 2 अक्टूबर 2029 | नवमी | पुनर्वसु | दोपहर 3:08 – शाम 4:37 |
| बुध, 3 अक्टूबर 2029 | दशमी | पुष्य | दोपहर 12:09 – दोपहर 1:38 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी है; सुबह 7:20 तक।
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र कृत्तिका है; सुबह 7:42 तक।
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में राहु काल कब है?
भोपाल में राहु काल दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 27 सितंबर 2029 को भोपाल में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:10 और सूर्यास्त शाम 6:11 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।