दैनिक पंचांग
बेंगलुरु पंचांग, गुरु, 20 मई 2032
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:53 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग हर्षण और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:52 – दोपहर 3:27 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:53
- सूर्यास्त
- शाम 6:39
- तिथि
- दशमी · सुबह 8:23 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी · शाम 5:28 तक
- योग
- हर्षण
- करण
- गर
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:52 – दोपहर 3:27
- यमगंड
- तड़के 5:53 – सुबह 7:29
- गुलिक काल
- सुबह 9:04 – सुबह 10:40
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:44 – दोपहर 12:32
- अमृत काल
- सुबह 11:28 – दोपहर 1:04
आज बेंगलुरु में
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:53 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग हर्षण और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:52 – दोपहर 3:27 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल बेंगलुरु के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 21 मई 2032 | एकादशी | हस्त | सुबह 10:40 – दोपहर 12:16 |
| शनि, 22 मई 2032 | द्वादशी | चित्रा | सुबह 9:04 – सुबह 10:40 |
| रवि, 23 मई 2032 | त्रयोदशी | स्वाती | शाम 5:04 – शाम 6:40 |
| सोम, 24 मई 2032 | चतुर्दशी | विशाखा | सुबह 7:28 – सुबह 9:04 |
| मंगल, 25 मई 2032 | पूर्णिमा | अनुराधा | दोपहर 3:28 – शाम 5:04 |
| बुध, 26 मई 2032 | प्रतिपदा | ज्येष्ठा | दोपहर 12:16 – दोपहर 1:52 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि दशमी है; सुबह 8:23 तक।
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है; शाम 5:28 तक।
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में राहु काल कब है?
बेंगलुरु में राहु काल दोपहर 1:52 – दोपहर 3:27 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 20 मई 2032 को बेंगलुरु में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:53 और सूर्यास्त शाम 6:39 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।