दैनिक पंचांग
बेंगलुरु पंचांग, शनि, 4 अक्टूबर 2031
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में सूर्योदय सुबह 6:08 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र भरणी, योग हर्षण और करण बव है। राहु काल सुबह 9:08 – सुबह 10:38 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:08
- सूर्यास्त
- शाम 6:07
- तिथि
- चतुर्थी · रात 10:00 तक
- नक्षत्र
- भरणी · सुबह 6:21 तक
- योग
- हर्षण
- करण
- बव
- वार
- शनिवार
- राहु काल
- सुबह 9:08 – सुबह 10:38
- यमगंड
- दोपहर 1:38 – दोपहर 3:08
- गुलिक काल
- सुबह 6:08 – सुबह 7:38
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:38 – दोपहर 12:26
- अमृत काल
- दोपहर 2:23 – दोपहर 3:52
आज बेंगलुरु में
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में सूर्योदय सुबह 6:08 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी, नक्षत्र भरणी, योग हर्षण और करण बव है। राहु काल सुबह 9:08 – सुबह 10:38 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल बेंगलुरु के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| रवि, 5 अक्टूबर 2031 | पंचमी | कृत्तिका | शाम 4:37 – शाम 6:07 |
| सोम, 6 अक्टूबर 2031 | षष्ठी | रोहिणी | सुबह 7:38 – सुबह 9:08 |
| मंगल, 7 अक्टूबर 2031 | सप्तमी | मृगशिरा | दोपहर 3:06 – शाम 4:36 |
| बुध, 8 अक्टूबर 2031 | अष्टमी | आर्द्रा | दोपहर 12:07 – दोपहर 1:36 |
| गुरु, 9 अक्टूबर 2031 | अष्टमी | पुनर्वसु | दोपहर 1:36 – दोपहर 3:05 |
| शुक्र, 10 अक्टूबर 2031 | नवमी | पुष्य | सुबह 10:37 – दोपहर 12:06 |
सामान्य प्रश्न
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्थी है; रात 10:00 तक।
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र भरणी है; सुबह 6:21 तक।
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में राहु काल कब है?
बेंगलुरु में राहु काल सुबह 9:08 – सुबह 10:38 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शनि, 4 अक्टूबर 2031 को बेंगलुरु में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:08 और सूर्यास्त शाम 6:07 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।