दैनिक पंचांग
बेंगलुरु पंचांग, सोम, 10 जून 2030
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग वज्र और करण बालव है। राहु काल सुबह 7:29 – सुबह 9:05 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:45
- तिथि
- नवमी · रात 7:00 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी · दोपहर 1:03 तक
- योग
- वज्र
- करण
- बालव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:29 – सुबह 9:05
- यमगंड
- सुबह 10:42 – दोपहर 12:19
- गुलिक काल
- दोपहर 1:55 – दोपहर 3:32
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:46 – दोपहर 12:34
- अमृत काल
- सुबह 6:41 – सुबह 8:17
आज बेंगलुरु में
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग वज्र और करण बालव है। राहु काल सुबह 7:29 – सुबह 9:05 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल बेंगलुरु के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 11 जून 2030 | दशमी | हस्त | दोपहर 3:32 – शाम 5:09 |
| बुध, 12 जून 2030 | एकादशी | चित्रा | दोपहर 12:19 – दोपहर 1:56 |
| गुरु, 13 जून 2030 | द्वादशी | स्वाती | दोपहर 1:56 – दोपहर 3:32 |
| शुक्र, 14 जून 2030 | त्रयोदशी | अनुराधा | सुबह 10:43 – दोपहर 12:19 |
| शनि, 15 जून 2030 | पूर्णिमा | ज्येष्ठा | सुबह 9:06 – सुबह 10:43 |
| रवि, 16 जून 2030 | प्रतिपदा | मूल | शाम 5:10 – शाम 6:46 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि नवमी है; रात 7:00 तक।
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है; दोपहर 1:03 तक।
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में राहु काल कब है?
बेंगलुरु में राहु काल सुबह 7:29 – सुबह 9:05 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 10 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:52 और सूर्यास्त शाम 6:45 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।