दैनिक पंचांग
बेंगलुरु पंचांग, रवि, 2 जून 2030
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र मृगशिरा, योग सुकर्मा और करण बव है। राहु काल शाम 5:06 – शाम 6:42 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:52
- सूर्यास्त
- शाम 6:42
- तिथि
- प्रतिपदा · दोपहर 2:21 तक
- नक्षत्र
- मृगशिरा · तड़के 4:36 तक
- योग
- सुकर्मा
- करण
- बव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 5:06 – शाम 6:42
- यमगंड
- दोपहर 12:17 – दोपहर 1:53
- गुलिक काल
- दोपहर 3:30 – शाम 5:06
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:45 – दोपहर 12:33
- अमृत काल
- दोपहर 1:05 – दोपहर 2:42
आज बेंगलुरु में
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय तड़के 5:52 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा, नक्षत्र मृगशिरा, योग सुकर्मा और करण बव है। राहु काल शाम 5:06 – शाम 6:42 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल बेंगलुरु के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 3 जून 2030 | द्वितीया | आर्द्रा | सुबह 7:28 – सुबह 9:05 |
| मंगल, 4 जून 2030 | तृतीया | आर्द्रा | दोपहर 3:30 – शाम 5:07 |
| बुध, 5 जून 2030 | चतुर्थी | पुनर्वसु | दोपहर 12:18 – दोपहर 1:54 |
| गुरु, 6 जून 2030 | पंचमी | पुष्य | दोपहर 1:54 – दोपहर 3:31 |
| शुक्र, 7 जून 2030 | षष्ठी | आश्लेषा | सुबह 10:42 – दोपहर 12:18 |
| शनि, 8 जून 2030 | सप्तमी | मघा | सुबह 9:05 – सुबह 10:42 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि प्रतिपदा है; दोपहर 2:21 तक।
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मृगशिरा है; तड़के 4:36 तक।
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में राहु काल कब है?
बेंगलुरु में राहु काल शाम 5:06 – शाम 6:42 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 2 जून 2030 को बेंगलुरु में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:52 और सूर्यास्त शाम 6:42 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।