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नामांक

नाम अंक ज्योतिष: आपके नाम के अंक क्या कहते हैं

नाम अंक ज्योतिष हर अक्षर को एक अंक देता है और कुल योग पढ़ता है। यह साधन कैल्डियन और पाइथागोरस दोनों पद्धतियों में आपका नामांक निकालता है, उसे मूलांक और भाग्यांक से मिलाता है, और चाहें तो ऐसे वर्तनी बदलाव सुझाता है जो इन्हें एक सुर में लाएँ।

कैल्डियन पद्धति

भारत में सबसे अधिक प्रचलित कैल्डियन पद्धति रोमन अक्षरों को एक से आठ तक मान देती है: ए, आई, जे, क्यू और वाई को 1; बी, के और आर को 2; सी, जी, एल और एस को 3; डी, एम और टी को 4; ई, एच, एन और एक्स को 5; यू, वी और डब्ल्यू को 6; ओ और ज़ेड को 7; एफ और पी को 8। अंक 9 किसी अक्षर को नहीं दिया जाता, क्योंकि उसे पवित्र माना जाता है। योग को एक अंक तक घटाया जाता है, पर घटाने से पहले का संयुक्त अंक भी पढ़ा जाता है।

मूलांक और भाग्यांक

जन्म तारीख को एक अंक तक घटाने पर मूलांक मिलता है; 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 5 है। पूरी जन्मतिथि जोड़कर घटाने पर भाग्यांक मिलता है। नामांक को इन दोनों के साथ पढ़ा जाता है।

ग्रह और अंक

भारतीय अंक ज्योतिष में हर अंक का एक स्वामी ग्रह है: 1 सूर्य, 2 चंद्र, 3 गुरु, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि और 9 मंगल। जिन अंकों के ग्रह मित्र हैं, जैसे 1 और 3, वे साथ अच्छे बैठते हैं; शत्रु ग्रहों के अंक टकराव ला सकते हैं।

वर्तनी में बदलाव

कुछ लोग नामांक को मूलांक से मिलाने के लिए एक अक्षर जोड़ते या दोहराते हैं। साधन ऐसे रूप और उनके योग सूचीबद्ध करता है। कोई भी बदलाव निजी चुनाव है; बहुत से लोग नाम वैसा ही रखते हैं और बस उसे बेहतर समझते हैं।

दुकान और प्रतिष्ठान के नाम

यही विधि दुकान या प्रतिष्ठान के नाम पर भी लगती है। मालिक प्रायः ऐसा योग खोजते हैं जो उनके अपने मूलांक से मेल खाए और उन संयुक्त अंकों से बचे जिन्हें परंपरा में कठिन माना गया है।

परिणाम पढ़ना

परिणाम में अंक, उसका ग्रह, उससे जुड़े गुण, और यह टिप्पणी मिलती है कि वह आपके मूलांक और भाग्यांक के साथ कैसे बैठता है।

अक्षर ही ब्रह्म

हमारी परंपरा में अक्षर का अर्थ ही है जो नष्ट न हो। पाणिनि के माहेश्वर सूत्र शिव के डमरू की चौदह ध्वनियों से निकले बताए जाते हैं, और तंत्र में वर्णमाला के अक्षरों को मातृका देवियाँ माना गया। अवकहड़ा चक्र नाम के पहले अक्षर से ही नाम राशि बताता है, जिससे विवाह मिलान तक होता है। आर्यभट ने तो अंकों को अक्षरों में लिखने की अपनी पद्धति बनाई। नाम में छिपे अंक को पढ़ना उसी पुरानी आस्था का नया रूप है कि ध्वनि में एक लय और शक्ति है।

अपना नामांक जाँचें

  1. नाम लिखें. जैसे आप सामान्यतः लिखते हैं।
  2. जन्मतिथि जोड़ें. मूलांक और भाग्यांक के लिए।
  3. मेल पढ़ें. देखिए अंक कैसे मेल खाते हैं और कौन से रूप सुझाए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन सी पद्धति अपनाऊँ?

भारत में कैल्डियन सबसे प्रचलित है; पश्चिम में पाइथागोरस। दोनों दिखाई जाती हैं।

कैल्डियन में 9 क्यों नहीं?

उसे पवित्र और पूर्ण माना जाता है, इसलिए कोई अक्षर उसे नहीं धारण करता।

संयुक्त अंक क्या है?

एक अंक तक घटाने से पहले का दो अंकों का योग, जिसका अपना अर्थ है।

क्या पूरा नाम लूँ?

वह नाम लीजिए जो आप सबसे अधिक उपयोग करते हैं, जो काम और कागज़ात में है।

मेरा मूलांक क्या है?

जन्म तारीख को एक अंक तक घटाकर मिलने वाला अंक।

भाग्यांक क्या है?

पूरी जन्मतिथि का योग, एक अंक तक घटाया हुआ।

क्या वर्तनी बदलना ज़रूरी है?

नहीं। यह वैकल्पिक है, और बहुत से लोग नाम वैसा ही रखते हैं।

क्या बच्चे का नाम जाँच सकते हैं?

हाँ। नाम और जन्मतिथि लिखिए।

क्या प्रतिष्ठान का नाम जाँच सकते हैं?

हाँ। नाम और मालिक की जन्मतिथि लिखिए।

क्या आद्याक्षर गिने जाते हैं?

हाँ, यदि आप रोज़ उन्हें नाम के भाग की तरह उपयोग करते हैं।

कौन से अंक शुभ हैं?

यह आपके मूलांक पर निर्भर है; आपके मित्र अंक दिखाए जाते हैं।

अंक 4 का ग्रह कौन है?

राहु।

क्या अंक ज्योतिष ज्योतिष का विकल्प है?

नहीं। यह अलग और सरल परंपरा है, जो प्रायः कुंडली के साथ उपयोग होती है।

क्या देवनागरी में नामांक वही रहेगा?

ये पद्धतियाँ रोमन अक्षरों के लिए बनी थीं, इसलिए मान उसी वर्तनी के हैं। साधन वही वर्तनी लेता है जो आप लिखते हैं।