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सामान्य

शिशु नामकरण

जन्म नक्षत्र के अनुसार शुभ प्रारंभिक अक्षर। वर्तनी नाम विज्ञान से जाँचें।

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नामकरण

नक्षत्र और परंपरा के अनुसार शिशु का नाम चुनना

बहुत से भारतीय परिवारों में बच्चे का नाम उस अक्षर से शुरू होता है जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र और चरण से जुड़ा हो। यह साधन जन्म विवरण से वह पहला अक्षर निकालता है, फिर उससे शुरू होने वाले नाम सुझाता है, उनके अर्थ, उनके पीछे के देवता या गुण, और अंक ज्योतिष के मान के साथ।

नाम अक्षर

सत्ताईस नक्षत्रों में से हर एक के चार चरण हैं, और हर चरण की एक ध्वनि है, यही नामाक्षर है। अश्विनी के चू, चे, चो, ला; रोहिणी के ओ, वा, वी, वू; उत्तरा फाल्गुनी के टे, टो, पा, पी। रोहिणी के तीसरे चरण में जन्मे बच्चे को परंपरा से वी से शुरू होने वाला नाम मिलता है, जैसे विक्रम, विष्णु या विद्या। साधन जन्म के ठीक समय से चरण निकालता है।

नामकरण संस्कार

नामकरण सोलह संस्कारों में पाँचवाँ है। यह प्रायः जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन, सूतक पूरा होने पर, या पंचांग से चुने किसी शुभ दिन होता है। कुलदेवता की छोटी सी पूजा के बाद पिता या घर के बड़े बच्चे के दाहिने कान में नाम धीरे से कहते हैं। कई घरों में थाली में चावल फैलाकर उस पर नाम लिखा जाता है, और बुआ बच्चे को नए वस्त्र पहनाती है।

नक्षत्र की ध्वनि से आगे

कई परिवार कुलदेवता, दादा दादी का नाम, नाम का अर्थ और घर की बोली में उसका स्वर भी देखते हैं। कुछ लोग पूजा पाठ के लिए एक नक्षत्र नाम और रोज़ पुकारने के लिए अलग नाम रखते हैं। सुझावों में दोनों रीतियों का सम्मान है।

अंक ज्योतिष और संतुलन

हर सुझाव के साथ उसका कैल्डियन अंक दिखता है। अंक ज्योतिष मानने वाले परिवार ऐसा नामांक चाहते हैं जो जन्म तारीख के अंक, यानी मूलांक, से मेल खाए। साधन मेल खाने वाले नामों को चिह्नित करता है, बाकी को हटाता नहीं।

कई भाषाओं में अर्थ

नाम अपने संस्कृत या तमिल मूल और अर्थ के साथ, आपकी चुनी लिपि में दिए जाते हैं, ताकि दादा दादी और जन्म प्रमाणपत्र एक ही वर्तनी पर सहमत रहें।

सोच समझकर चुनें

तीन चार नाम छाँटिए, उन्हें कुल नाम के साथ बोलकर सुनिए, और घर में बोली जाने वाली हर भाषा में अर्थ जाँचिए। नाम जीवन भर साथ चलता है, इसलिए परंपरा जल्दबाज़ी की जगह शांत चर्चा की सलाह देती है।

नाम में बसा नक्षत्र

नाम केवल पुकार का शब्द नहीं; हमारे पूर्वजों के लिए शब्द स्वयं ब्रह्म था। गृह्यसूत्र कहते हैं कि नाम सुनने में सुखद हो और उसके अक्षर शुभ हों। मान्यता है कि जन्म नक्षत्र की ध्वनि से शुरू होने वाला नाम जब भी पुकारा जाता है, उस तारे का आशीर्वाद बच्चे तक पहुँचता है। इसीलिए मंदिर में संकल्प करते समय नाम, गोत्र और नक्षत्र साथ बोले जाते हैं। तुलसीदास ने कहा, राम नाम मनि दीप धरु; राम, कृष्ण, शिव या दुर्गा के नाम पर बच्चे का नाम रखना उसी नाम महिमा की परंपरा है।

नक्षत्र नाम खोजें

  1. जन्म विवरण भरें. तारीख, ठीक समय और स्थान।
  2. अक्षर देखें. नक्षत्र, चरण और ध्वनि दिखाई जाती है।
  3. नाम छाँटें. अर्थ, देवता और भाषा से छाँटकर पसंदीदा नाम सहेजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नामाक्षर क्या है?

नाम का पहला अक्षर, जो जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र चरण से तय होता है।

क्या जन्म का ठीक समय चाहिए?

हाँ। चरण लगभग हर छह घंटे में बदलता है, और उसके साथ अक्षर भी।

नामकरण कब होता है?

प्रायः ग्यारहवें या बारहवें दिन, या पंचांग के किसी शुभ दिन।

क्या नाम किसी और अक्षर से शुरू हो सकता है?

हाँ। कई परिवार नक्षत्र नाम केवल पूजा के लिए रखते हैं और रोज़ का नाम अलग चुनते हैं।

क्या तमिल नाम भी हैं?

हाँ, संस्कृत नामों के साथ शुद्ध तमिल नाम भी।

क्या अंक ज्योतिष ज़रूरी है?

वैकल्पिक है। मूलांक से मेल खाने वाले नाम चिह्नित होते हैं।

यदि बच्चा नक्षत्र बदलने के आसपास जन्मा हो?

साधन दोनों नक्षत्र उनके समय के साथ दिखाता है, ताकि आप अस्पताल के अभिलेख से मिलान कर सकें।

क्या आधुनिक नाम भी सुझाए जाते हैं?

हाँ। पारंपरिक मूल वाले छोटे आधुनिक नाम भी शामिल हैं।

क्या अर्थ से छाँट सकते हैं?

हाँ। साहस, ज्ञान या प्रकाश जैसे गुणों से।

क्या देवता से छाँट सकते हैं?

हाँ। राम, कृष्ण, शिव, देवी, हनुमान आदि से जुड़े नाम चुने जा सकते हैं।

क्या नाम का लिंग दिखता है?

हाँ, और किसी भी बच्चे के योग्य नाम अलग से चिह्नित हैं।

क्या चुने नाम सहेज सकते हैं?

हाँ। सहेजिए और परिवार के साथ बाँटिए।

थोट्टिल संस्कार क्या है?

तमिल रीति, जिसमें बच्चे को पहली बार पालने में रखा जाता है, प्रायः नामकरण के दिन ही।

क्या पहले से पसंद किसी नाम को जाँच सकते हैं?

हाँ। उसे लिखिए और उसका अर्थ, अंक, और नक्षत्र ध्वनि से मेल देखिए।