मुहूर्त
संगीत और नलंगु मुहूर्त
विवाह से पहले की आनंद भरी संध्या उत्तर में संगीत और तमिल घरों में नलंगु कहलाती है। गीत, खेल और हल्की रस्मों के साथ दोनों परिवार निकट आते हैं।
- शुभ तिथियाँ
- द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी
- जाँचा गया शहर
- चेन्नई
संगीत और नलंगु के बारे में
विवाह से पहले की आनंद भरी संध्या उत्तर में संगीत और तमिल घरों में नलंगु कहलाती है। गीत, खेल और हल्की रस्मों के साथ दोनों परिवार निकट आते हैं।
इस संध्या का भाव
उत्तर भारत में संगीत में ढोलक, लोकगीत और नृत्य होते हैं। नलंगु में वर वधू के पैरों पर हल्दी और चंदन लगाया जाता है, नारियल लुढ़काने और पापड़ तोड़ने जैसे खेल होते हैं, और घर की स्त्रियाँ लोकगीत गाती हैं।
शुभ संध्या का चयन
आरंभ राहुकाल में न हो, शुक्ल पक्ष हो और रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, रेवती जैसे कोमल नक्षत्र हों, ऐसी संध्या अच्छी है। विवाह मुहूर्त प्रधान है, इसलिए संगीत उसी के अनुसार एक दो दिन पहले रखा जाता है।
गीतों और खेलों का अर्थ
इन गीतों में वर वधू से मीठी चुटकियाँ ली जाती हैं, जिससे दोनों परिवारों में अपनापन बढ़ता है। अंगूठी ढूँढने और फूलों की गेंद फेंकने जैसे खेल माहौल को हल्का और आनंदमय बनाते हैं।
परिवारों के मिलन की संध्या
संगीत केवल मनोरंजन नहीं; दोनों परिवारों के बड़े और संबंधी पहली बार मिलकर वर वधू को आशीर्वाद देते हैं। हल्दी, चंदन और कुमकुम जैसी मंगल वस्तुएँ नज़र दोष दूर करती हैं, यह श्रद्धा है। अंत में आरती उतारकर आए हुए अतिथियों को मिठाई और शगुन देकर विदा करना परंपरा है।
संगीत और नलंगु के शास्त्रीय नियम
तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।
सामान्य प्रश्न
संगीत और नलंगु के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?
शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।
संगीत और नलंगु में किन बातों से बचना चाहिए?
शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: अष्टमी, अमावस्या।
क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?
बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।
सूची में कितनी तिथियाँ हैं?
अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।
क्या राहुकाल देखा गया है?
राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।
क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?
हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।
क्या संगीत और नलंगु का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?
हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।
शुभ दिन न मिले तो संगीत और नलंगु कैसे करें?
उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।
संगीत और नलंगु के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?
प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।