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मुहूर्त

नामकरण मुहूर्त

शिशु का विधिवत नाम रखने का संस्कार नामकरण है। प्रायः जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन, अन्यथा बाद में किसी शुभ दिन यह किया जाता है।

शुभ नक्षत्र
रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, रेवती
शुभ तिथियाँ
रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ
जाँचा गया शहर
चेन्नई

सटीक मुहूर्त समय देखें

नामकरण के बारे में

शिशु का विधिवत नाम रखने का संस्कार नामकरण है। प्रायः जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन, अन्यथा बाद में किसी शुभ दिन यह किया जाता है।

संस्कार

पिता चुना हुआ नाम शिशु के दाहिने कान में धीरे से कहते हैं, और बड़े अक्षत डालकर आशीर्वाद देते हैं। कई परिवारों में पालना रस्म भी इसी दिन होती है।

नाम का चयन

शिशु के जन्म नक्षत्र के चरण का अक्षर, नामाक्षर, लेकर नाम रखने की परंपरा है। कुलदेवता या दादा दादी के नाम पर नाम रखना भी स्नेह भरी रीति है।

दिन का चयन

शुक्ल पक्ष और रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, श्रवण, रेवती जैसे कोमल या स्थिर नक्षत्र पसंद किए जाते हैं। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार श्रेष्ठ हैं; ग्रहण के दिन और राहुकाल से बचा जाता है।

नाम का अर्थ

देवता का नाम या किसी अच्छे गुण का बोध कराने वाला शब्द नाम हो, यह परंपरा कहती है। सरल उच्चारण और मधुर अर्थ वाला नाम जीवन भर शिशु के लिए आशीर्वाद बना रहता है। नाम रखने के बाद बड़ों द्वारा शिशु को गोद में लेकर आशीष देना स्नेह भरी रीति है।

नामकरण के शास्त्रीय नियम

शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, रेवती। शुभ तिथियाँ: रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ। वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।

सामान्य प्रश्न

नामकरण के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

परंपरा के अनुसार नामकरण के लिए शुभ नक्षत्र हैं: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, रेवती।

नामकरण के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?

शुभ तिथियाँ: रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।

नामकरण में किन बातों से बचना चाहिए?

शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?

तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?

बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।

सूची में कितनी तिथियाँ हैं?

अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।

क्या राहुकाल देखा गया है?

राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।

क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?

हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।

क्या नामकरण का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?

हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।

शुभ दिन न मिले तो नामकरण कैसे करें?

उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।

नामकरण के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?

प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।