मुहूर्त
शांति मुहूर्त मुहूर्त
विवाह के बाद दंपती के गृहस्थ जीवन का पवित्र आरंभ शांति मुहूर्त है। संस्कारों में इसे गर्भाधान कहा जाता है और इसके लिए शांत, शुभ रात्रि चुनी जाती है।
- शुभ नक्षत्र
- रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, स्वाती, रेवती
- शुभ तिथियाँ
- रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ
- जाँचा गया शहर
- चेन्नई
शांति मुहूर्त के बारे में
विवाह के बाद दंपती के गृहस्थ जीवन का पवित्र आरंभ शांति मुहूर्त है। संस्कारों में इसे गर्भाधान कहा जाता है और इसके लिए शांत, शुभ रात्रि चुनी जाती है।
अलग मुहूर्त क्यों
दोनों की जन्म राशि से आठवें भाव में चन्द्रमा न हो, और अमावस्या तथा ग्रहण न हो, ऐसी रात्रि चुनी जाती है। यह सोलह संस्कारों में से एक माना जाता है।
उस संध्या की रीति
कक्ष को फूलों, फलों और मिठाइयों से सजाया जाता है और बड़े दंपती को आशीर्वाद देते हैं। गृह देवता के सामने दीपक जलाकर सामंजस्य और स्वस्थ संतान की प्रार्थना की जाती है।
दिन के चयन में ध्यान
कन्या के मासिक धर्म के पहले चार दिन और भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा नक्षत्र वर्जित हैं। रोहिणी, तीनों उत्तरा, हस्त, स्वाति, अनुराधा और रेवती शुभ माने जाते हैं।
देव पूजा से आरंभ
उस संध्या दंपती गृह देवता के सामने दीपक जलाकर कुलदेवता को प्रणाम करते हैं और बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं। गृहस्थ जीवन प्रेम, धैर्य और परस्पर सम्मान पर टिके, यही इस संस्कार का भाव है।
शांति मुहूर्त के शास्त्रीय नियम
शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, स्वाती, रेवती। शुभ तिथियाँ: रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ। वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा।
तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।
सामान्य प्रश्न
शांति मुहूर्त के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?
परंपरा के अनुसार शांति मुहूर्त के लिए शुभ नक्षत्र हैं: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, स्वाती, रेवती।
शांति मुहूर्त के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?
शुभ तिथियाँ: रिक्ता के अतिरिक्त शुक्ल पक्ष की तिथियाँ (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।
शांति मुहूर्त में किन बातों से बचना चाहिए?
शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, भरणी, कृत्तिका, आश्लेषा।
क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?
बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।
सूची में कितनी तिथियाँ हैं?
अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।
क्या राहुकाल देखा गया है?
राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।
क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?
हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।
क्या शांति मुहूर्त का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?
हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।
शुभ दिन न मिले तो शांति मुहूर्त कैसे करें?
उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।
शांति मुहूर्त के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?
प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।