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मुहूर्त

सगाई मुहूर्त

विवाह को दोनों परिवारों द्वारा विधिवत पक्का करने की रस्म सगाई है। दक्षिण में इसे निश्चयतार्थम कहते हैं, जहाँ विवाह की लग्न पत्रिका भी पढ़ी जाती है।

शुभ नक्षत्र
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, रेवती, उत्तराषाढा
शुभ तिथियाँ
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी और एकादशी
जाँचा गया शहर
चेन्नई

सटीक मुहूर्त समय देखें

सगाई के बारे में

विवाह को दोनों परिवारों द्वारा विधिवत पक्का करने की रस्म सगाई है। दक्षिण में इसे निश्चयतार्थम कहते हैं, जहाँ विवाह की लग्न पत्रिका भी पढ़ी जाती है।

रस्म

दोनों परिवार पान, सुपारी, फल, हल्दी और वस्त्र से सजी थालियाँ बदलते हैं और विवाह की तिथि की घोषणा होती है। उत्तर भारत में अँगूठी पहनाने की रस्म इसी भाव से होती है। पुरोहित चुने गए शुभ समय की घोषणा करते हैं।

दिन का चयन

शुक्ल पक्ष, कोमल नक्षत्र और दोनों के लिए अच्छा चन्द्र बल वाला दिन श्रेष्ठ है। सगाई विवाह से कुछ महीने पहले होती है, इसलिए दोनों तिथियाँ साथ देखना अच्छा है।

सगाई के बाद

सगाई के बाद दोनों घरों में विवाह की तैयारी शुरू होती है। कन्या को साड़ी और वर को वस्त्र भेंट करना स्नेह का प्रतीक है।

लग्न पत्रिका

सगाई के समय पुरोहित दोनों परिवारों के नाम, गोत्र, विवाह की तिथि और मुहूर्त का समय लिखी लग्न पत्रिका पढ़ते हैं। इसके बाद दोनों पक्ष शगुन का आदान प्रदान करते हैं और विवाह की तैयारियाँ आरंभ होती हैं।

सगाई के शास्त्रीय नियम

शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, रेवती, उत्तराषाढा। शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी और एकादशी। वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।

सगाई के लिए आने वाली शुभ तिथियाँ (चेन्नई)
दिनांकनक्षत्रतिथि
शुक्र, 30 अक्टूबर 2026मृगशिरापंचमी
गुरु, 5 नवंबर 2026उत्तरा फाल्गुनीएकादशी
बुध, 11 नवंबर 2026अनुराधाद्वितीया
गुरु, 26 नवंबर 2026मृगशिराद्वितीया
गुरु, 3 दिसंबर 2026उत्तरा फाल्गुनीदशमी
शुक्र, 4 दिसंबर 2026हस्तएकादशी
शनि, 12 दिसंबर 2026उत्तराषाढ़ातृतीया
शनि, 19 दिसंबर 2026रेवतीदशमी

सामान्य प्रश्न

सगाई के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

परंपरा के अनुसार सगाई के लिए शुभ नक्षत्र हैं: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, अनुराधा, रेवती, उत्तराषाढा।

सगाई के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?

शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी और एकादशी (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।

सगाई में किन बातों से बचना चाहिए?

शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?

तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?

बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।

सूची में कितनी तिथियाँ हैं?

अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।

क्या राहुकाल देखा गया है?

राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।

क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?

हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।

क्या सगाई का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?

हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।

शुभ दिन न मिले तो सगाई कैसे करें?

उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।

सगाई के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?

प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।