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मुहूर्त

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ मुहूर्त

नई दुकान, कार्यालय या व्यवसाय शुरू करने का दिन उसकी उन्नति की नींव माना जाता है। धन और लाभ के भाव बलवान हों, ऐसा समय चुना जाता है।

शुभ नक्षत्र
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती
शुभ तिथियाँ
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी
जाँचा गया शहर
चेन्नई

सटीक मुहूर्त समय देखें

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के बारे में

नई दुकान, कार्यालय या व्यवसाय शुरू करने का दिन उसकी उन्नति की नींव माना जाता है। धन और लाभ के भाव बलवान हों, ऐसा समय चुना जाता है।

शुभारंभ के दिन

नए स्थान पर गणेश पूजन और लक्ष्मी पूजन होता है, कई जगह छोटा हवन भी। पहली बिक्री, बोहनी, किसी प्रसन्न ग्राहक को की जाती है और पहले सिक्के गल्ले में सँभालकर रखे जाते हैं। संध्या को द्वार पर दीपक जलाया जाता है।

शुभ नक्षत्र और वार

अश्विनी, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, रेवती और तीनों उत्तरा नक्षत्र पसंद किए जाते हैं; बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार श्रेष्ठ वार हैं।

व्यवसाय टिके, इसके लिए

शुभारंभ के दिन अन्नदान करना और पहली कमाई का एक अंश मंदिर में अर्पित करना समृद्धि देता है, यह श्रद्धा है। तिजोरी उत्तर दिशा में रखना और रोज़ दीपक जलाना कई व्यापारियों की रीति है।

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के शास्त्रीय नियम

शुभ नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती। शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी। वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के लिए आने वाली शुभ तिथियाँ (चेन्नई)
दिनांकनक्षत्रतिथि
बुध, 21 अक्टूबर 2026धनिष्ठादशमी
शुक्र, 30 अक्टूबर 2026मृगशिरापंचमी
गुरु, 5 नवंबर 2026उत्तरा फाल्गुनीएकादशी
शनि, 7 नवंबर 2026चित्रात्रयोदशी
बुध, 11 नवंबर 2026अनुराधाद्वितीया
सोम, 16 नवंबर 2026श्रवणसप्तमी
रवि, 22 नवंबर 2026रेवतीत्रयोदशी
गुरु, 26 नवंबर 2026मृगशिराद्वितीया
गुरु, 3 दिसंबर 2026उत्तरा फाल्गुनीदशमी
शुक्र, 4 दिसंबर 2026हस्तएकादशी
शनि, 12 दिसंबर 2026उत्तराषाढ़ातृतीया
सोम, 14 दिसंबर 2026श्रवणपंचमी

सामान्य प्रश्न

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

परंपरा के अनुसार दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के लिए शुभ नक्षत्र हैं: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती।

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?

शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ में किन बातों से बचना चाहिए?

शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या।

क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?

तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?

बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।

सूची में कितनी तिथियाँ हैं?

अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।

क्या राहुकाल देखा गया है?

राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।

क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?

हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।

क्या दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?

हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।

शुभ दिन न मिले तो दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ कैसे करें?

उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।

दुकान या व्यवसाय का शुभारंभ के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?

प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।