मुहूर्त
भूमि पूजन मुहूर्त
घर या भवन का निर्माण शुरू करने से पहले भूमि देवी से अनुमति और आशीर्वाद माँगने का संस्कार भूमि पूजन है। भवन पीढ़ियों तक टिके, इसलिए स्थिर नक्षत्र पसंद किए जाते हैं।
- शुभ नक्षत्र
- रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, उत्तर भाद्रपद, रेवती
- शुभ तिथियाँ
- द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी
- जाँचा गया शहर
- चेन्नई
भूमि पूजन के बारे में
घर या भवन का निर्माण शुरू करने से पहले भूमि देवी से अनुमति और आशीर्वाद माँगने का संस्कार भूमि पूजन है। भवन पीढ़ियों तक टिके, इसलिए स्थिर नक्षत्र पसंद किए जाते हैं।
पूजन की विधि
पुरोहित गणेश, भूमि देवी और वास्तु पुरुष का आवाहन करते हैं, और भूखंड के ईशान कोण में पहली कुदाल चलाई जाती है। गड्ढे में नवधान्य, ताँबे का कलश और सिक्के रखे जाते हैं। भूमि के स्वामी पत्नी के साथ पूजा करते हैं और कारीगरों को मिठाई बाँटते हैं।
ऋतु का चयन
सूर्य जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुम्भ राशि में हो, वे मास पसंद किए जाते हैं; चातुर्मास से बचा जाता है।
वास्तु की बातें
भूखंड का ईशान कोण स्वच्छ और नीचा रहे, यह वास्तु परंपरा है। कुआँ या जल का टैंक भी इसी दिशा में रखना शुभ माना जाता है। पूजन से पहले भूमि पर गाय को चलाना भी कई स्थानों की रीति है।
भूमि पूजन के शास्त्रीय नियम
शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, उत्तर भाद्रपद, रेवती। शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी। वर्जित: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, मंगलवार।
तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
यह सूची चेन्नई में सूर्योदय के समय इस संस्कार के लिए अनुकूल नक्षत्र और तिथि वाले दिन दिखाती है। पूर्ण मुहूर्त में वार, योग, करण, कार्य के समय का लग्न, राहुकाल और संबंधित लोगों की कुंडली भी देखी जाती है; इसलिए इस सूची से दिन छाँटें और सटीक समय मुहूर्त खोज से तय करें।
| दिनांक | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|
| शनि, 24 अक्टूबर 2026 | उत्तरा भाद्रपद | त्रयोदशी |
| शुक्र, 30 अक्टूबर 2026 | मृगशिरा | पंचमी |
| गुरु, 5 नवंबर 2026 | उत्तरा फाल्गुनी | एकादशी |
| शनि, 7 नवंबर 2026 | चित्रा | त्रयोदशी |
| बुध, 11 नवंबर 2026 | अनुराधा | द्वितीया |
| शनि, 21 नवंबर 2026 | उत्तरा भाद्रपद | एकादशी |
| रवि, 22 नवंबर 2026 | रेवती | त्रयोदशी |
| गुरु, 26 नवंबर 2026 | मृगशिरा | द्वितीया |
| गुरु, 3 दिसंबर 2026 | उत्तरा फाल्गुनी | दशमी |
| शुक्र, 4 दिसंबर 2026 | हस्त | एकादशी |
| शनि, 12 दिसंबर 2026 | उत्तराषाढ़ा | तृतीया |
| शनि, 19 दिसंबर 2026 | रेवती | दशमी |
सामान्य प्रश्न
भूमि पूजन के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?
परंपरा के अनुसार भूमि पूजन के लिए शुभ नक्षत्र हैं: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढा, उत्तर भाद्रपद, रेवती।
भूमि पूजन के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?
शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी (हर पक्ष में गिनी जाती हैं)।
भूमि पूजन में किन बातों से बचना चाहिए?
शास्त्रीय सूचियाँ इनसे बचने को कहती हैं: रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, मंगलवार।
क्या ये तिथियाँ हर शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ चेन्नई के सूर्योदय पर जाँची गई हैं। नक्षत्र और तिथि का परिवर्तन हर जगह एक ही क्षण होता है पर स्थानीय समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
क्या व्यक्तिगत मुहूर्त फिर भी ज़रूरी है?
बड़े संस्कारों के लिए हाँ। तारा बल, चन्द्र बल और कार्य का लग्न संबंधित लोगों की कुंडली से तय होते हैं।
सूची में कितनी तिथियाँ हैं?
अगले साठ दिनों में वे बारह तक दिन, जिनमें नक्षत्र और तिथि दोनों नियम मिलते हैं।
क्या राहुकाल देखा गया है?
राहुकाल पूरे दिन का नियम नहीं, दिन का एक खंड है। सटीक समय तय करते समय उससे बचें; हर तिथि के पंचांग पृष्ठ पर वह दिया है।
क्या दूसरे संस्कारों के लिए भी खोज सकते हैं?
हाँ। मुहूर्त खोज कई और कार्यों के लिए दिन क्रम से दिखाती है और आप अपना जन्म विवरण भी जोड़ सकते हैं।
क्या भूमि पूजन का मुहूर्त हमारी कुंडली के अनुसार बदला जा सकता है?
हाँ। सामान्य मुहूर्त सबके लिए शुभ समय दिखाता है; परिवार के ज्योतिषी संबंधित लोगों के जन्म नक्षत्र और चल रही दशा देखकर उनमें से सबसे अच्छा समय चुनते हैं।
शुभ दिन न मिले तो भूमि पूजन कैसे करें?
उपलब्ध दिनों में सबसे अच्छा दिन चुनकर, गणेश और कुलदेवता की पूजा से आरंभ करें, और मुख्य क्षण को बलवान लग्न या अभिजित मुहूर्त में रखें, यही परंपरा है।
भूमि पूजन के लिए दिन का कौन सा समय अच्छा है?
प्रायः प्रातः या पूर्वाह्न का समय पसंद किया जाता है। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचकर शुभ होरा में आरंभ करना परंपरा है।