Skip to content

विंशोत्तरी दशा

शनि महादशा

शनि की महादशा उन्नीस वर्ष की होती है और धैर्य, व्यवस्था व नियमित परिश्रम से सिखाती है। ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, और परिणाम अनुशासन, लगन और सेवा से आते हैं, अक्सर धीरे, पर स्थायी रूप से।

ग्रह
शनि
अवधि (वर्ष)
19
अंतर्दशा क्रम
शनि → बुध → केतु → शुक्र → सूर्य → चन्द्र → मंगल → राहु → गुरु

अपनी दशा तिथियाँ मुफ़्त देखें

शनि दशा के फल

शनि की महादशा उन्नीस वर्ष की होती है और धैर्य, व्यवस्था व नियमित परिश्रम से सिखाती है। ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, और परिणाम अनुशासन, लगन और सेवा से आते हैं, अक्सर धीरे, पर स्थायी रूप से। यह दीर्घकालिक योजनाओं, समय के साथ बढ़ने वाले करियर और बड़े संगठनों या समुदायों के साथ काम के अनुकूल है। विश्राम, यथार्थवादी गति और दूसरों का सहयोग भार को संभालने योग्य रखते हैं। आपकी कुंडली में शनि की स्थिति और बल बताते हैं कि उसके पाठ कैसे टिकाऊ उपलब्धि में बदलते हैं।

विंशोत्तरी चक्र कैसे चलता है

विंशोत्तरी दशा 120 वर्ष के जीवन चक्र को नौ ग्रह दशाओं में बाँटती है: केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष। जन्म की दशा जन्म नक्षत्र के स्वामी से तय होती है। हर महादशा उसी क्रम में, अपने ग्रह से शुरू होने वाली नौ अंतर्दशाओं में बँटती है।

अपनी कुंडली में दशा पढ़ना

दशा उन भावों का फल देती है जिनका वह ग्रह आपकी कुंडली में स्वामी है और जिनमें बैठा है, साथ ही उसका बल और युति भी। शनि और गुरु का गोचर समय जोड़ता है। यहाँ के सामान्य फल ग्रह का स्वभाव बताते हैं; आपकी कुंडली के भाव तय करते हैं कि वे कहाँ दिखेंगे।

शनि महादशा की नौ अंतर्दशाएँ
अंतर्दशाअवधिफल
शनि3 व 0 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। शनि की अंतर्दशा इन विषयों को ज़िम्मेदारी, लंबे परिश्रम, व्यवस्था और धैर्य की परीक्षा में लाती है। जब कोई ग्रह अपनी ही दशा में अपनी अंतर्दशा चलाता है, तो उसका स्वभाव पूरी शक्ति से अनुभव होता है, अच्छे और कठिन दोनों रूपों में।
बुध2 व 8 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। बुध की अंतर्दशा इन विषयों को पढ़ाई, कागज़ी काम, व्यापार और नए संपर्कों में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी के प्रति सम है, इसलिए फल कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
केतु1 व 1 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। केतु की अंतर्दशा इन विषयों को चिंतन, अचानक अंतर्दृष्टि और पूरी हो चुकी चीज़ों से शांत अलगाव में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी के प्रति सम है, इसलिए फल कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
शुक्र3 व 2 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। शुक्र की अंतर्दशा इन विषयों को संबंधों, सौंदर्य, सुख सुविधा और धन में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी का नैसर्गिक मित्र है, इसलिए दोनों साथ चलते हैं और यह समय प्रायः सहज बीतता है।
सूर्य0 व 11 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। सूर्य की अंतर्दशा इन विषयों को पहचान, नेतृत्व और सत्ता वालों से संबंध की ओर ले जाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी का नैसर्गिक शत्रु है, इसलिए यह समय विवेक, धैर्य और दोनों ग्रहों के उपाय माँगता है।
चंद्र1 व 7 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। चंद्रमा की अंतर्दशा इन विषयों को भावना, पारिवारिक जीवन, यात्रा और जनसंपर्क में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी के प्रति सम है, इसलिए फल कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
मंगल1 व 1 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। मंगल की अंतर्दशा इन विषयों को तेज़ कर्म, प्रतिस्पर्धा, संपत्ति और शारीरिक श्रम में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी के प्रति सम है, इसलिए फल कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
राहु2 व 10 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। राहु की अंतर्दशा इन विषयों को बेचैनी, विदेशी संबंधों और लीक से हटकर मिलने वाले अवसरों में लाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी का नैसर्गिक मित्र है, इसलिए दोनों साथ चलते हैं और यह समय प्रायः सहज बीतता है।
गुरु2 व 6 माशनि की महादशा में बड़ा अध्याय काम, कर्तव्य, धैर्य और समय के साथ धीरे बनने वाली चीज़ों का है। गुरु की अंतर्दशा इन विषयों को मार्गदर्शन, आशीर्वाद, संतान और अच्छी सलाह की ओर ले जाती है। अंतर्दशा का स्वामी दशा स्वामी के प्रति सम है, इसलिए फल कुंडली में दोनों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।

सामान्य प्रश्न

शनि महादशा कितने वर्ष की होती है?

विंशोत्तरी पद्धति में शनि महादशा 19 वर्ष की होती है। इसमें जन्मे लोगों के लिए जन्म के समय बचा भाग ही लागू होता है।

शनि महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

अंतर्दशाएँ शनि अंतर्दशा से शुरू होकर विंशोत्तरी क्रम में चलती हैं। इस पृष्ठ की तालिका नौ अंतर्दशाओं को अवधि सहित दिखाती है।

क्या शनि महादशा शुभ है?

यह आपकी कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर है: भाव, राशि, बल और दृष्टियाँ।

मेरी शनि महादशा कब शुरू होगी?

आपकी कुंडली जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से हर दशा की आरंभ और समाप्ति तिथि निकालती है। मुफ़्त कुंडली बनाकर दशा भाग खोलें।

अंतर्दशा की अवधि कैसे निकाली जाती है?

महादशा के वर्षों को अंतर्दशा ग्रह के वर्षों से गुणा करके 120 से भाग दें। उदाहरण: शनि दशा में शनि अंतर्दशा (19 × 19) ÷ 120 वर्ष।

शनि महादशा में क्या उपाय करें?

ग्रह का मंत्र, उसके वार को दान और नियमित दिनचर्या पारंपरिक उपाय हैं। रत्न पूरी कुंडली की जाँच के बाद ही पहनें।

क्या KP ज्योतिष भी यही दशा उपयोग करता है?

हाँ। KP भी विंशोत्तरी दशा का उपयोग करता है और नक्षत्र के भीतर उप-स्वामी जोड़कर घटनाओं का सूक्ष्म समय निकालता है।

क्या एक ही दशा में दो लोगों का अनुभव अलग होता है?

हाँ, क्योंकि ग्रह हर कुंडली में अलग भावों का स्वामी होता है।